बागपत। जिले के सूखे तालाबों में अस्थाई गोवंश आश्रय केंद्र खोले जाने की तैयारी की जा रही है। ऐसे सभी तालाबों का चिह्नांकन किया जाएगा, जिसमें पानी नहीं है। सीडीओ पीसी जायसवाल ने डीपीआरओ को औरैया मॉडल की तर्ज पर कार्रवाई कराने के लिए निर्देशित किया है। वहीं प्रधानों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
प्रशासन की ओर से गोवंश आश्रय और कान्हा आश्रय स्थलों पर कार्य तेजी के साथ काम कराया जा रहा है। अब उन तालाबों की खोज शुरू कर दी, जिसमें पानी नहीं पहुंचता है। उसमें गोवंशीय पशुओं के आश्रय स्थल बनाए जाएंगे। इसके लिए गांवों में ऐसी जगहों की खोज कराई जा रही है। सीडीओ पीसी जायसवाल ने डीपीआरओ को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है। बताया कि सूखे तालाबों में गोवंश आश्रय स्थल बन सकते हैं। मुख्य रास्ते पर दरवाजा लगाकर अन्य कोई कार्य कराने की जरूरत नहीं है। वहीं बोरिंग और टीन शेड की व्यवस्था हो सकती है। इस तरह का कार्य औरैया जनपद की ग्राम पंचायतों में चल रहा है। इसी तर्ज पर बागपत जिले में भी कार्य कराया जाएगा। इसमें प्रधानों का सहयोग भी लेंगे। जो भी तालाब सूखा मिलेगा, उसमें गोवंश आश्रय स्थल बनवा दिया जाएगा। सामर्थ्य के अनुसार गोवंशों को रखवा दिया जाएगा। सीडीओ पीसी जायसवाल ने बताया कि सूखे तालाब गोवंशों का रहने का सही ठिकाना बन सकते हैं। इससे किसानों को भी समस्या से मुक्ति मिलेगी। इस योजना पर कार्य किया जा रहा है।
तुगाना गांव के प्रधान भी रखी गोवंश की समस्या
बागपत। तुगाना गांव के प्रधान धर्मेंद्र सिंह सीडीओ से मिले। बताया कि गांव में ग्राम समाज की भूमि नहीं है, जिस कारण 160 गोवंशीय पशुओं से किसान परेशान हो गए। स्कूल में बंद करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन उन्हें रोक दिया। बताया कि राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में एक भवन खाली पड़ा है, जिसको पूर्व में निरस्त कर दिया गया था। वहीं स्कूल से छह बीघा जमीन भी इसी से जुड़ी हुई है। सीडीओ पीसी जायसवाल ने डीपीआरओ को तुरंत इस संबंध में कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया है।