बागपत। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि 23 सितंबर से किसानों के लिए आंदोलन का बिगुल फूंका जाएगा। हरिद्वार स्थित चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत घाट से किसान क्रांति यात्रा शुरू होगी। यह यात्रा विभिन्न जिलों से होते हुए दिल्ली संसद पर समाप्त होगी। इस मौके पर लाखों किसान शामिल होंगे।
शहर के एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से बातचीत में चौधरी टिकैत ने कहा कि कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों को धोखा दिया। जो वायदे किए वो पूरे नहीं हुए। कागजों में काम किया जा रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और है। यात्रा का मुख्य उद्देश्य होगा कि पूरे देश के किसानों का कर्ज माफ और बाद में बिना ब्याज का कर्ज दिया जाए। सरकार किसानों को कृषि वैज्ञानिक का दर्जा दें। सरकार 10 साल पूरे ट्रैक्टर को बंद कर रही है, ऐसा नियम भी बनाया जाए कि किसानों का ट्रैक्टर कंपनी ले और दूसरे ट्रैक्टर देने की व्यवस्था करें। इस सरकार में सबसे ज्यादा किसान पीड़ित है। प्रदेश में अन्य राज्य के मुकाबले बिजली के दाम अधिक है। फसल बीमा योजना से भी किसानों को नुकसान पहुंचा है। जब तक किसान के खेत की इकाई मानकर नुकसान की भरपाई नहीं होगी तब कोई फायदा होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि किसान क्रांति यात्रा में प्रदेश ही नहीं पूरे देश से किसान शामिल होंगे। विभिन्न किसान संगठन के अध्यक्ष यात्रा की अगुवाई करेंगे। यात्रा हरिद्वार से शुरू होकर रुड़की, मुजफ्फरनगर, खतौली, मेरठ, मोदीनगर से होते दिल्ली पहुंचेगी। टिकैत ने बताया कि 1987 के आंदोलन की तर्ज पर यात्रा के हर 20 किलो मीटर के पड़ाव पर ग्रामीण खाने की व्यवस्था करेंगे। उनके साथ अग्रवाल मंडी टटीरी के चेयरमैन विनोद कुमार, प्रदीप गुर्जर, इंद्रपाल सिंह, विनीत मौजूद रहे।
पार्लियामेंट में छोड़ देंगे ट्रैक्टर
राष्ट्रीय प्रवक्ता ने बताया कि किसान यात्रा के समापन पर पार्लियामेंट में प्रत्येक जिले के हर एक गांव से 21 किसान और एक ट्रैक्टर लाने की अपील की जा रही है। पार्लियामेंट में ट्रैक्टरों को किसान छोड़कर चले जाएंगे, इनका संग्रहालय बनवाया जाए।
दिल्ली में रहने वाले लोगों की भी ली गई बैठक
भाकियू नेता प्रदीप गुर्जर ने बताया कि किसान क्रांति यात्रा के लिए दिल्ली की ज्योति कॉलोनी में भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने गांव छोड़कर दिल्ली में रहने वाले लोगों की बैठक ली। उनसे भी यात्रा को सफल बनाने और किसानों के साथ एकजुट होने का आह्वान किया । शहरों के किसान लोगों को भी सरकार की किसान विरोधी नीतियों को बतायाऋ।