बागपत (बागपत)।
प्रेमी के झांसे में आई किशोरी को न्यायपीठ बाल कल्याण समिति ने काउंसिलिंग करके मां-बाप का महत्व समझाया तो उसने अपना निर्णय बदल दिया। किशोरी ने अपने किए पर पछतावा जाहिर किया और प्रेमी की बजाय अपनी मां के साथ घर वापस लौट गई।
न्यायपीठ सीडब्लूसी के न्याय प्राधिकारी डॉ. कुलदीप त्यागी ने बताया कि खेकड़ा कस्बा क्षेत्र की एक किशोरी कक्षा नौ की छात्रा है। उसे फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर ने अपने प्रेम जाल में फंसा लिया और उसे लेकर फरार हो गया। किशोरी को हरिद्वार में छोड़कर वह मजदूर वापस लौट आया। किशोरी के परिजनों ने खेकड़ा पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस ने मजदूर को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने किशोरी के हरिद्वार में होने की जानकारी दी। पुलिस ने किशोरी को बरामद कर लिया। इसके बाद महिला थाना पुलिस ने किशोरी और उसकी मां को न्यायपीठ के सामने प्रस्तुत किया। शुरूआत में किशोरी अपने प्रेमी के साथ जाने की जिद पर अड़ी रही। इसके बाद न्यायपीठ के न्याय प्राधिकारी राजीव यादव, डॉ. कुलदीप त्यागी और मालती शर्मा ने किशोरी की लंबी काउंसिलिंग की। किशोरी को मां-बाप के महत्व को समझाया और नाबालिग उम्र में उठाए गए कदम के दुष्परिणाम से अवगत कराया।
न्यायपीठ ने कहा कि नाबालिग उम्र में की गई शादी कानूनी तौर पर अवैध होती है। बाल विवाह करना कानूनन अपराध है और उसका उल्लंघन करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होती है। काफी देर समझाने के बाद किशोरी ने अपने किए पर खेद व्यक्त कर अपनी मां के साथ जाने पर सहमति दी। न्यायपीठ ने किशोरी को उसकी मां की सुपुर्दगी में देने का आदेश जारी किया। साथ ही मां को भी अपनी बेटी की ठीक प्रकार से देखभाल करने की हिदायत दी। इसमें कोताही बरतने पर कड़ी कार्रवाई की भी चेतावनी दी।