बागपत। भाव और भुगतान की समस्या से जूझ रहे किसानों के सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है। पर्याप्त इंडेंट नहीं मिलने के कारण गेहूं की बुआई पर संकट के बादल हैं। जिले में अभी तक सिर्फ 25 फीसदी गेहूं की बुआई ही हो सकी है। दिसंबर माह को गेहूं की बुआई के लिए उपयुक्त आखिरी महीना माना जाता है। ऐसे में इस बार गेहूं की बुआई कैसे होगी। अगेती प्रजाति के गन्ने की बुआई करने वाले किसान समस्याएं झेल रहे हैं। सामान्य प्रजाति के गन्ने की बुआई करने वाले किसान चिंता में डूबे हुए हैं। किसान समितियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इंडेंट में संशोधन से लेकर पर्चियों के जारी नहीं होने के कारण किसान परेशान हैं। खेतों में अभी भी 70 फीसदी गन्ना खड़ा हुआ है। सवाल है कि आखिर गेहूं की बुआई कैसे होगी।
55 हजार हेक्टेयर पर उगाया जाता है गेहूं
बागपत। जिले में गेहूं का रकबा करीब 55 हजार हेक्टेयर है। उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार का कहना है कि फिलहाल 25 से 30 फीसदी गेहूं की बुआई हो चुकी है।
सामान्य प्रजाति का जल्द देंगे इंडेंट
बागपत। प्रभारी डीसीओ विनीत कुमार का कहना है किसानों की समस्या को देखकर जल्द ही सामान्य प्रजाति के गन्ने का इंडेंट भी जारी कराने की तैयारी है। इसके अलावा जो समस्याएं है, उनका समाधान तलाशा जा रहा है।
क्या कहते हैं किसान
बागपत। युवा रालोद के जिलाध्यक्ष प्रमेंद्र तोमर का कहना है कि भाजपा किसान विरोधी है। किसानों को भुगतान तो क्या दिलाएंगे, सिर्फ इंडेंट ही जारी नहीं कराया जा रहा है।
भाकियू जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर ने कहा कि किसान संकट में है और भाजपा नेताओं के पास समस्या का कोई समाधान नहीं है। किसान आखिर गेहूं की बुआई कैसे करेंगे।
अब गेहूं बुआई से घटेगा उत्पादन
बागपत। कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा के प्रभारी डॉ. गजेंद्र सिंह का कहना है कि दिसंबर में भी बुआई को लेट माना जाता है। दिसंबर के बाद बुआई से किसान को नुकसान होगा। उत्पादन में गिरावट आएगी। गेहूं की बुआई के लिए उपयुक्त समय अक्तूबर और नवंबर को ही माना जाता है, लेकिन पश्चिम यूपी में दिसंबर तक किसान आमतौर पर बुआई करते हैं।