बागपत। दीपावली के 22 दिन बाद भी हवा की गुणवत्ता में सुधार होता नहीं दिख रहा है। स्मॉग भले ही हट गया हो, लेकिन हवा की गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब है। बुधवार को बागपत की हवा नोएडा से भी ज्यादा खराब रही। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के गुणवत्ता सूचकांक के मुताबिक एक्यूआई 365 पर रही। ऐसी हवा में सांस के रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि सुबह और शाम सावधानी बरतनी जरूरी है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बुधवार को जो गुणवत्ता सूचकांक जारी किया है, उसमें बागपत का पीएम 2.5 का औसत एक्यूआई 365 दर्शाया गया है। यह स्थिति खराब है। इससे जाहिर है कि बागपत की हवा सांस लेने लायक नहीं है। नोएडा की गुणवत्ता 346 और गाजियाबाद का सूचकांक भी 365 ही दर्ज किया गया है। दिन में कभी धूप और कभी छांव की स्थिति बनीं रही। वायु सूचकांक में रोज परिवर्तन होता है। सुबह और शाम के समय में भी अंतर रहता है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो हवा की रफ्तार कम है। लेकिन अगर हवा की रफ्तार तेज हो गई तो वायु की गुणवत्ता में सुधार हो सकेगा।
सुबह और शाम के समय बरतें सावधानी
बागपत। सीएचसी बागपत के अधीक्षक डॉ. विभाष राजपूत, पिलाना सीएचसी के अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह का कहना है कि हवा की गुणवत्ता खराब है। ऐसे में यह सुबह और शाम के समय अधिक हानिकारक होती है। इस समय घर से निकलने से परहेज करें या फिर मॉस्क लगाकर ही निकलें। सांस संबंधी बीमारियां बढ़ सकती है। फेफड़ों के रोग भी हो सकते हैं। जब तक हवा की सेहत में सुधार हो, तब तक अल सुबह घर से निकलने से बचना चाहिए।