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तब तक लटकाया जाए, जब तक मृत्यु न हो जाए

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बागपत। कोर्ट के फैसले में लिखा गया कि अभियुक्त अनिल कश्यप को आरोप अंतर्गत धारा 302 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत मृत्युदंड से दंडित किया जाता है। उसे गर्दन से तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए। फैसले में अदालत ने केस को विरल से विरलतम माना है। यह स्पष्ट है कि अभियुक्त का अपराध इतना जघन्य है, कि अपराध की कल्पना मात्र ही सिंहरन पैदा करती है और सामाजिक संबंधों में पाश्विकता को दर्शाती है। एक छह वर्षीय अबोध बालिका के साथ बर्बर और पैशाचिक कृत्य कारित कर उसकी नृशंस हत्या कर दी गई। इस वजह से यह अपराध विरल से विरलतम है। फैसले में सुप्रीम कोर्ट के साल 2005 में अभियुक्त सतीश के खिलाफ दिए गए फैसले को नजीर बनाया। इस केस में भी मृतका की उम्र छह साल थी। विशाखा नाम की मासूम स्कूल गई, लेकिन घर नहीं लौटी। आरोपी ने इसकी रेप के बाद हत्या कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के फैसलों की नजीर दी गई है।
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निर्भया कांड गूंजा तो दाखिल हुई चार्जशीट

बागपत। मासूम बच्ची की लाश 12 दिसंबर 2012 को ईंख के खेत में पड़ी मिली। पुलिस की जांच चल ही रही थी कि इस बीच दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को निर्भया कांड हो गया। दिल्ली का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंजा तो बागपत पुलिस भी हरकत में आ गई थी। यही वजह रही कि बच्ची की रेप के बाद हत्या के सिर्फ 12 दिन बाद ही विवेचक ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपपत्र दाखिल कर दिया था।
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