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चीनी मिलों व सरकार के गठजोड़ से बेईमानी की बू आती

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बिनौली (बागपत)। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार का किसानों की उपज का दाम बढ़ाने का फार्मूला गलत है। निजी चीनी मिलों व सरकार के गठजोड़ से बेइमानी की बू आती है। खेती किसानी के मुद्दों को लेकर भाकियू 23 सितंबर से हरिद्वार से दिल्ली संसद तक किसान क्रांति यात्रा निकालेगी।
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बुधवार को जिवाना गुलियान के सिद्धगुरु नीलकंठ आश्रम में पत्रकारों से रूबरू राकेश टिकैत ने कहा भाजपा ने केंद्र में सरकार बनने से पूर्व अपने घोषणा पत्र में फसलों की लागत का डेढ़ गुना दाम देने की घोषणा की थी। पिछले दिनों केंद्र सरकार द्वारा किसानों की उपज का दाम देने का जो फार्मूला घोषित किया है, वो गलत है। स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट में लागत पर 50 फीसदी जोड़कर दिए जाने की सिफारिश की गई है जबकि सरकार ने कृषि फार्मों के आंकड़े लेकर दाम तय करने का फार्मूला दिया है, जो गलत है। किसान की जमीन की कीमत तय करके ही लागत का सही पता चलेगा।
उन्होंने कहा कि फसल बीमा योजना का किसानों को कोई लाभ नही मिल रहा है, जबकि केसीसी कार्ड से बीमा प्रीमियम काटी जा रही है। कर्ज माफी के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीतियों से ही किसान कर्जदार हुआ है। कर्जमाफी की योजना पूरे देश के किसानों के लिये एक समान रूप से लागू होनी चाहिए। प्रदेश सरकार ने विद्युत दरों में बेतहाशा वृद्धि कर किसानों की कमर तोड़ने का काम किया है जबकि अन्य प्रदेशों में विद्युत दरें काफी कम हैं। गन्ना मूल्य भुगतान के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार और निजी चीनी मिलों के गठजोड़ से बेईमानी की बू आती है, जिसके चलते किसानों को गन्ने का भुगतान नही मिल पा रहा है। उन्होंने दस वर्ष पुराने डीजल वाहनों पर रोक में किसान के ट्रैक्टर को शामिल करने को गलत ठहराया।
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