बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाइवे के निर्माण के लिए एनएच ने सर्वे शुरू करा दिया है। जल्द ही इसका निर्माण शुरू होने की संभावना है। चार जिलों से होकर गुजरने वाले हाइवे में गड्ढ़ों की वजह से लोग परेशानी झेल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के साथ 26 मई को हाइवे का उद्घाटन कर सकते हैं।
फोरलेन प्रस्तावित हाइवे पर निर्माण की शुरूआत 30 मार्च 2012 को हुई थी। लेकिन ठेकेदार कंपनी के डायरेक्टर्स समेत अन्य लोगों के खिलाफ 455 करोड़ के घपले का मुकदमा दर्ज कराया गया। सिसाना, बावली, कासिमपुर, रमाला और ककड़ीपुर तक गहरे गड्ढे हैं। मार्च 2012 को निर्माण कार्य शुरू होने के बाद बागपत जिले में करीब सात हजार पेड़ काटे गए थे। सिसाना और सरूरपुर कलां जैसे गांवों में लोगों के मकानों पर बुलडोजर चला था। ठेकेदार कंपनी ने आखिरी बार गाजियाबाद के लोनी में फ्लाईओवर निर्माण का कार्य किया था। नवंबर 2013 में यहां भी काम रोक दिया गया, इसके बाद कोई कार्य नहीं किया गया। केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह के प्रयास से अब यह हाइवे एनएच को हैंडओवर कर दिया गया है। एनएचएआई के सदस्य नीरज वर्मा ने बताया कि जल्द ही निर्माण शुरू होगा। इसके लिए सर्वे कराया जा रहा है।
विधायक ने दर्ज कराया था मुकदमा
बागपत। दिल्ली-यमुनौत्री हाइवे पर गड्ढों के कारण होने वाले हादसों के चलते बसपा विधायक ने ठेकेदार कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। विधायक का कहना था कि कंपनी कार्य में देरी कर रही है, जिस कारण लोगों को जान माल का नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसके बाद यह पूरा मामला विधानसभा में भी उठाया गया था। सरूरपुर कलां में गुफा वाले मंदिर के निकट वर्ष 2016 में हाइवे पर युवक की मौत हो गई थी। बड़ौत के बसपा विधायक लोकेश दीक्षित ने इस मामले में अन्य हादसों का जिक्र करते हुए बागपत कोतवाली में ठेकेदार कंपनी को हादसों का जिम्मेदार बताते हुए मुकदमा दर्ज कराया था।
बागपत का सबसे बड़ा मुद्दा
बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाइवे बागपत की सियासत का भी सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। वजह है कि दिल्ली के नजदीक होने के बावजूद इस हाइवे की वजह से जिले के लोग दिल्ली से दूर हैं। केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने प्रयास कर इसे एनएच को हैंडओवर कराया, जहां इसके जल्द शुरू होने की उम्मीद बंधी है।