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भक्तामर विधान में ण्मोकार महामंत्र की पूजा

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बागपत। सरूरपुर कलां गांव में स्थित श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे भक्तामर विधान में महा अर्चना के 35वें भक्ति पूर्वक अभिषेक और शांति धारा की गई। विधान में आए श्रद्धालुओं ने सर्व रिद्धि सिद्धी प्रदाता भक्तामर के 48 अर्घ्य अर्पित किए। इस दौरान ण्मोकार महामंत्र की पूजा-अर्चना की।
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कार्यक्रम निदेशक नमन जैन ने धर्मसभा में कहा कि आज संसार में बुद्धि की कमी नहीं है, पर शुद्धि की बहुत कमी है। बुद्ध बनने के लिए बुद्धि नहीं शुद्धि की आवश्यकता है। लोगों की बुद्धि सृजन में कम विध्वंश में ज्यादा लगी हुई है। बुद्धि जोड़ने में कम तोड़ने में ज्यादा लग रही है। जीवन किसी को नहीं थकाता, बुद्धि थका देती है। संसार में कुछ बुद्धिमान तो केवल मीमांसा करने में ही लगे रहते हैं। अंधेरे को कोसने में ही जीवन लगा देते हैं। इस बुद्धि का शोधन कैसे किया जाए। सत्संग के आश्रय से ही बुद्धि का शोधन संभव है। अंकित जैन ने विधान कराया। इसमें लक्ष्य, वैशाली, पूर्ति, मेघा, प्रज्ञा, सिम्मी, शालू, गीता, संतोष, उषा जैन आदि रही।
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