बागपत। वर्तमान गन्ना पेराई सत्र के नियमित भुगतान की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को जोर का झटका लगा है। मलकपुर चीनी मिल पेराई के दौरान वर्तमान सत्र का नहीं, बल्कि पिछले गन्ना पेराई सत्र का ही भुगतान करेगी। जबकि अभी तक डीएम और गन्ना विभाग किसानों को आश्वासन दे रहे थे कि नए सत्र का भुगतान नियमित कराया जाएगा। नए आदेश का किसानों ने विरोध शुरू कर दिया है।
मलकपुर चीनी मिल पर किसानों का करोड़ों रुपये बकाया है। भुगतान का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। चीनी मिल ने मार्च महीने तक भुगतान का शेड्यूल सौंपा । तय किया था नए गन्ना पेराई सत्र का भुगतान प्रत्येक 14 दिन बाद एसडीएम की निगरानी और मिल एवं डीसीओ के संयुक्त खाते से किया जाएगा। तय किया था कि मिल की चीनी और अन्य उत्पाद के 85 प्रतिशत से किसानों का भुगतान, जबकि शेष 15 फीसदी चीनी मिल को दिया जाएगा। चीनी मिल ने 23 अक्तूबर को गन्ना पेराई शुरू कर दी, लेकिन नए गन्ना पेराई सत्र में नियमित भुगतान की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को जोर का झटका लगा है। वर्तमान गन्ना पेराई सत्र के उत्पादन से चीनी मिल पिछले सत्र का बकाया चुकाएगा। डीसीओ सुशील कुमार ने इसकी पुष्टि की है। गन्ना विभाग का कहना है मिल इस प्रयास में है कि इस सत्र के आखिरी तक दोनों सत्र का भुगतान कर दिया जाएगा। इसके लिए मिल ने करीब 260 करोड़ के लोन लेने के लिए तैयारी कर रखी है।
डीएम पुराने शेड्यूल से कराए गन्ने का भुगतान
छपरौली (बागपत)। क्षेत्र के शबगा गांव में सुनील पंवार के आवास पर किसानों की पंचायत हुई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि डीएम के आदेश से किसान नाराज हैं। इस सत्र का भुगतान 14 दिन में तथा पिछला बकाया शेड्यूल के आधार पर देने पर सहमति जताई। बिना पक्षपात के इस प्रक्रिया से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। किसानों ने कहा कि डीएम ने पहले पिछला भुगतान कराने के निर्देश हैं जो किसान विरोधी है। मलकपुर मिल पर किसानों का पिछला 247 करोड़ रुपये का बकाया है। पंचायत में प्रक्रिया का विरोध किया और डीएम से पहले चालू पेराई गन्ना सत्र का भुगतान पहले कराने और बकाया शेड्यूल से कराने के आदेश जारी करने की मांग की गई। इसमें राजेंद्र सिंह, खाप चौधरी सुभाष, दया चंद, जयबीर, छत्रपाल, कालू राम, बलवान सिंह, कंवर पाल, राज कुमार आदि रहे।