फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिना मेहनत किये सफलता पाना चोरी के समान- अरूण मुनि

विज्ञापन
विज्ञापन
बिना मेहनत किए सफलता पाना चोरी के समान : अरुण मुनि
विज्ञापन

बड़ौत (बागपत)। जैन संत अरुण मुनि ने कहा कि पाप तो एक है, लेकिन उसे करने के तरीके अनेक होते हैं, जिस कार्य के करने से मनुष्य की आत्मा मलीन हो उसे पाप कहते हैं।
विज्ञापन

वे मंगलवार को जैन स्थानक शहर में धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बिना पुरुषार्थ किए जो सफलता चाहता है वह चोरी की श्रेणी में आता है। जो व्यक्ति एक बार चोरी में सफलता प्राप्त कर लेता है। फिर वह उसे अपना पेशा या रोजगार बना लेता है। चोरी करने के बाद मनुष्य का मन भयभीत रहता है। कहीं कोई देख तो नहीं रहा। इसी बात को लेकर मन में तनाव रहने लगता है। पाप करने वाला जब दुख भोगता है तो उसे उस समय की बात याद आती है जब वह पाप करने में मस्त रहता है। उन्होंने बताया कि व्यक्ति को पाप करने में मजा बहुत आता है। उसे पता नहीं होता कि जो गम उसने दूसरों को दिए हैं वे गम उसे भी उठाने पड़ेंगे। बुरे का फल बुरा और भले का फल भला होता है। इससे पूर्व अमन मुनि ने भी धर्मसभा में विचार रखे। धर्मसभा में डीके जैन, भारतभूषण, अनिल जैन, अनुराग जैन, अतुल जैन, हंस कुमार जैन, दीपक जैन, शैलबाला, इंद्राणी, कमलेश, छवि, मंजू, रेखा, पूनम आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें