अजहर भले ही दावा करें कि वह मुरादाबाद से ही चुनाव लड़ेंगे लेकिन ताजा हालात तो यही कह रहे हैं कि उनका टिकट मुरादाबाद से कटने जा रहा है।
रामपुर की सांसद नूरबानो के नाम पर दिल्ली में गंभीर चर्चा हुई है। स्थानीय नेताओं ने भी उनके नाम पर सहमति जताई है। राशिद अल्वी और एक अन्य मुस्लिम नेता के नाम पर भी विचार हुआ लेकिन फिलहाल ‘वोट’ सबसे अधिक नूरबानो के पक्ष में ही गए थे।
इन्हीं चर्चाओं के बीच शुक्रवार को कांग्रेस के आब्जर्वर भी आ रहे हैं जो जिला और महानगर कांग्रेसियों के साथ बैठक कर प्रत्याशियों का पैनल मांगेंगे।
कभी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे सांसद मोहम्मद अजहरुद्दीन की मुरादाबाद में सांसद के रूप में कप्तानी आगे शायद जारी न रह सके। इसकी वजह यह है कि यहां के सियासी जमीन पर उनकी चमक का फीकी हो जाना।
उनकी उपलब्धियों से ज्यादा यहां की पब्लिक की जुबां पर उनके यहां से लापता रहने की चर्चा रहती है। किसी भी कांग्रेस के बड़े आंदोलन, किसी भी बड़ी बैठक में वह नजर नहीं आए।
जब कोई बड़ा नेता आया तो आंधी की तरह सीधे सभा में पहुंचे और वहीं से मुरादाबाद को बाय बोलकर चलते बने। यही वजह है कि उनके नाम की चर्चा इस बार के चुनावों में यहां से धूमिल हो गई।
न तो यहां के नेताओं ने उनपर पसंदगी की मुहर लगाई है और न ही पब्लिक का रुख ऐसा है। ऐसे में रामपुर की पूर्व सांसद नूरबानो को मुरादाबाद से उतारने पर फैसला हो सकता है।
सूत्रों की मानें तो पिछले दिनों दिल्ली में कांग्रेस के उच्च नेताओं के बीच लोकप्रियता के हिसाब से प्रत्याशियों के चयन पर चर्चा मुरादाबाद के लिए हुई जिसमें नूरबानो का नाम सामने आया था। स्थानीय स्तर पर भी उनके नाम पर विचार मांगा गया था।