पैसा तो था नहीं फिर कान की बाली बेचकर ट्रक चालक को किराया दिया और बच्चों के साथ मुंबई से घर के लिए निकल पड़ी। आजमगढ़ रोडवेज बस स्टैंड के पास ट्रक चालक उसे छोड़कर चला गया। अब वह आजमगढ़ स्टेशन पर गोरखपुर जाने वाली बस के इंतजार में बैठी थी। उसका कहना है कि पूरे रास्ते कहीं भी न तो भोजन मिला न ही पानी। जो साथ लाई थी उसे बच्चों को खिलाकर किसी तरह यहां तक पहुंची है। बहुत परेशानी थी कि किसी तरह घर पहुंच जाऊं तो ही राहत मिले।