बछवल गांव में बुधवार की सुबह जेल में निरुद्ध अपने बेटे को छुड़ाने के लिए उसके पिता और चाचा ने मुख्य गवाह के घर हमला बोल दिया।
उसके मां और छोटे भाई को घायल कर घर में तोड़फोड़ किया तथा दरवाजे पर खड़ी बाइक फूंक दी। घायलों को सीएचसी मेंहनगर में भर्ती कराया गया है। घायलों ने बताया कि दो दिन पूर्व जेल में बंद आरोपी ने भी उन्हें फोन कर गवाही न देने की धमकी दी थी।
हंसा देवी अपने पति अशोक धरिकार और बच्चों के साथ मेंहनगर थाने के बछवल गांव स्थित अपने मायके में रहती हैं। दिसंबर 2012 में दीपावली से ठीक एक दिन पहले हंसा के भाई रुपचंद का बेटा श्यामबाबू अपनी बुआ की बेटी ललिता से शादी करने का दवाब बनाने लगा।
उसने इंकार कर दिया तो श्यामबाबू ने तेजाब फेंक दिया। इसमें ललिता की एक आंख चली गई। बिगड़े चेहरों का वह मुंबई में इलाज करवा रही है। इस मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी श्यामबाबू को गिरफ्तार कर लिया था।
तभी से वह जेल में है। इस घटना का मुख्य गवाह ललिता का बड़ा भाई मनोज और मां हंसा देवी है। अदालत में चल रहे उस मुकदमे में गवाही होनी है।
नौ नवंबर की शाम श्यामबाबू ने जेल से मुख्य गवाह मनोज को फोन कर गवाही न देने की धमकी दी। लेकिन मनोज ने उस गवाही की परवाह नहीं किया।
बुधवार की सुबह श्यामबाबू का पिता रुपचंद अपनी बहन के घर पहुंचा और उसने भी गवाही न देने की पेशकश की। जिसे उन लोगों ने ठुकरा दिया और घर से चले जाने को कहा।
गुस्साए रुपचंद ने अपने संग दीपचंद, फूलचंद और टिल्ठू आदि को लेकर मनोज उसकी मां हंसा देवी और छोटे भाई शनि पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया और घर में तोड़फोड़ की।
पुलिस अधीक्षक राकेश चंद्र साहू ने बताया कि दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का आदेश दिया गया है। क्राइम ब्रांच और सर्विलांस सेल जेल से फोन किए जाने की जांच कर रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद आरोपी के विरुद्ध एक और रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।