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मौसम ने बढ़ाई मुश्किलें

Wed, 29 Jun 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,आजमगढ़
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बारिश न होने से किसान परेशान
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सूखा, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से उबर नहीं पाए किसान इस बार भी अब तक अच्छी बारिश न होने से निराश हैं। अभी तक जैसी बारिश होनी चाहिए थी, हुई नहीं। इसके चलते साधन संपन्न किसान तो नर्सरी डाल चुके हैं लेकिन अन्य किसान अच्छी बारिश के इंतजार में हैं। जल्दी ही अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान का पैदावार का प्रभावित होना तय है।
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दो वर्षों से मौसम किसानों का दुश्मन बना हुआ है। कभी बारिश कम होने से फसल प्रभावित हुई तो कभी ओलावृष्टि ने उनकी बचीखुची फसलों को नुकसान पहुंचाया। इससे किसानों की कमर टूट चुकी है। किसान क्रेडिट कार्ड पर लिए गए कर्ज को भर नहीं पा रहे हैं। इसका परिणाम है कि इस बार धान की नर्सरी डालने के लिए किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी पर भरोसा करके किसानों ने बाजार से कर्ज लेकर धान की नर्सरी डाली।

22 जून को मानसून की पहली बारिश हुई। पहली बारिश जोरदार होने से किसानों के मन में एक आस जगी। दलहनी फसलों की बुआई करने के साथ ही धान की रोपाई के लिए खेतों को तैयार करना शुरू कर दिया लेकिन तब से बारिश की स्थिति नहीं बनी है। ऐसे में धान की नर्सरी को बचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। खेतों में धूल उड़ रही है। बादल रोज आते हैं लेकिन बिना बरसे ही चले जाते हैं। बिजली की अंधाधुंध कटौती ने मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। बिजली के अभाव में मोटर पंप भी ठप हैं। इससे धान की नर्सरी सूख रही है। डीजल इंजन से पानी भरने पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
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अहरौला क्षेत्र के गोपाली पट्टी गांव के प्रगतिशील किसान डा. रामसिंह पालीवाल, उदैना के डा. जेपी उपाध्याय, सूखीपुर के हनुमंत सिंह और सीरपट्टी बनपार के ओमकार पांडेय का कहना है कि बारिश न होने से पशुओं के चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। बुआई हुई नहीं है जो हुई भी वह सूख चुकी है। ट्यूबवेल दो से चार घंटे चलने के बाद पानी छोड़ देता है।
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