आजमगढ़। डॉ. रफी परवेज की संदिग्ध मौत के मामले में सोमवार को शहर कोतवाली में कोर्ट के आदेश पर पत्नी व साले के खिलाफ हत्या का मुकदमा पंजीकृत किया गया। घटना के समय ही वादी मुकदमा व मृतक की मां ने हत्या का आरोप लगाया था, लेकिन पुलिस ने ध्यान नहीं दिया।
जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. रफी परवेज की 23 दिसंबर 2018 को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। घटना के समय डॉ. रफी परवेज अस्पताल परिसर स्थित अपने सरकारी आवास पर ही थे। घर पर उस समय उनकी पत्नी साजिया व दो बच्चे सुहान व रेयाब के साथ ही साला परवेज हाशिम व दो-तीन अन्य लोग मौजूद थे। पत्नी ने डॉ. रफी को हार्टअटैक आने की बात कहते हुए एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती भी कराया था जहां से मौत की पुष्टि होने के बाद शव को पैतृक आवास वाराणसी लेकर चली गई और आनन-फानन में बिना पीएम कराए ही अंतिम संस्कार भी करा दिया। इसके बाद उनकी पत्नी बच्चों के साथ मायके महराजगंज जिले के लक्ष्मीपुर चली गई। डॉ. रफी की मां ने उसी समय बेटे के हत्या की आशंका जतायी थी और एसपी को पत्रक भेज कर पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी। पोस्टमार्टम हुआ, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर मृतक की मां अफरोज जहां निवासिनी सलेमपुर थाना आदमपुर वाराणसी ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर सोमवार को शहर कोतवाली में पत्नी शाजिया हाशिम, साला परवेज हाशिम व दो-तीन अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। मां का यह भी आरोप है कि अस्पताल में मौत की पुष्टि के बाद उसे शव देखने तक नहीं दिया गया। अंतिम संस्कार के लिए जब शव खोला गया था तो चेहरा नीला पड़ा था और सूजा हुआ था। गर्दन में दाहिनी तरफ गोली लगने जैसा निशान था, जिस पर टेप लगा हुआ था। इतना ही नहीं नाक व कान से खून बह रहा था और मुंह से झाग आ रहा था। पैरो की अंगुली लूंगी की फटन से बंधा हुआ था। मां ने बेटे व बहु के बीच के रिश्ते में तनाव होने की भी बात कही है। वहीं आरोपी परवेज हाशिम का कहना है कि उन लोगों को फंसाया जा रहा है। इसकी पीछे संपत्ति का विवाद है।