प्रतिरोध का सिनेमा अभियान के तहत नगर के नेहरू हाल परिसर में आयोजित चौथे आजमगढ़ फिल्म फेस्टिवल का समापन रविवार को 'मोहन जोशी हाजिर हों' फिल्म के प्रदर्शन के साथ हुआ। तीन दिनों तक चले इस फिल्म फेस्टिवल में दर्शक सिनेमा के सभी रूपों से परिचित हुए।
सिनेमा में आम आदमी के दुख दर्द, संघर्ष और रोजमर्रा के जीवन को दर्शाने वाली फिल्म के साथ ऐसी फिल्म दिखाई गई जो देश की ज्वलंत समस्याओं पर केंद्र थी। तीन दिन तक चले इस फिल्मोत्सव में 'ये हिटलर के साथ', 'नया पता', 'मुजफ्फरनगर बाकी है', 'अचल', 'हमारे घर', 'द फैक्ट्री', कोर्ट और 'मोहन जोशी हाजिर हों' फिल्म दिखाई गई।
इसमें बच्चों का सत्र सर्वाधिक पसंद किया गया। सिनेमा के साथ-साथ दर्शकों से संवाद के लिए भी एक मंच के रूप में इसे पाकर दर्शकों ने इसे उत्साह और नए अनुभव के साथ ग्रहण किया। वहीं, पुस्तक प्रदर्शनी में हिंदी, अंग्रेजी, समाज विज्ञान, शिक्षा शास्त्र, कहानी, उपन्यास के साथ बच्चों की पुस्तकें और फिल्म की डीवीडी भी उपलब्ध रही।
तीसरे दिन के कार्यक्रम की शुरुआत पेरिस में मारे गए नागरिकों और बच्चों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्घांजलि देकर हुआ। फिल्मोत्सव के संयोजक डा. विनय सिंह यादव ने सभी का आभार व्यक्त किया।