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जिले में बेधड़क हो रहा जल दोहन, जिम्मेदारों को पता नहीं

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आजमगढ़। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, पानी की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। जलस्रोत भी घटने लगे हैं। यह समस्या हर साल पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ ही जाती है। बावजूद लोग बेधड़क होकर वाहन धुलाई केंद्र खोलकर जल दोहन कर रहे हैं। हर रोज हजारों लीटर पानी की बर्बादी हो रही है, लेकिन कार्रवाई दूर, जिम्मेदार नोटिस भी न भेज सकें।
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अधिकारियों की लापरवाही के चलते बिना किसी रोक-टोक धड़ल्ले से वाहन धुलाई केंद्रों की गिनती बढ़ती जा रही है। यहां पर पचास से 300 रुपये में गाड़ी धोने के नाम पर लेकर हजारों लीटर पीने का पानी बर्बाद कर दिया जाता है। पानी की बर्बादी रोकने को बनाया गया कानून हर रोज हजारों लीटर पानी के साथ नालियों में बह जाता है। वाहन धुलाई सेंटरों पर तो रोज पानी की बर्बादी हो रही है। वहीं शहर के अधिकांश घरों में भी सबमर्सिबल पंपों से पानी का दोहन खूब किया जा रहा है। उस पर जिम्मेदारों की अनदेखी इस बर्बादी को खूब बढ़ावा दे रही है। विभागीय अधिकारियों का तो कहना है कि उन्हें पता ही नहीं कि जिले में धड़ल्ले से चल रहे वाहन धोने वाला सेंटर्स के लिए लाइसेंस लिए भी गए हैं नहीं। सरकार ने पानी की बर्बादी करने वालों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान कर रखा है। लेकिन विभाग की ओर से पानी खराब करने वाले ऐसे किसी भी व्यक्ति पर जुर्माना नहीं लगाया जा रहा है। वाहनों के सर्विस और धुलाई सेंटर पर प्रतिदिन पीने योग्य पानी का जमकर दुरूपयोग वाहनों की धुलाई में हो रहा है। भूगर्भ जल विभाग में पदस्थ जल वैज्ञानिक आनंद प्रकाश ने बताया कि जिले में भू जल का स्तर गिर रहा है। अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। विभाग के पोर्टल पर वाहनों धुलाई सेंटर के लिए आवेदन करना होगा। विभाग उन्हें लाइसेंस जारी करेगा। इसके बाद ही वह संचालित कर सकेंगे। बगैर पंजीकरण संचालित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ इन्हें बंद कराया जाएगा।
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