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Azamgarh News: देवारा में वायरल बुखार का प्रकोप, गांवों में चहुंओर फैली गंदगी, जगह-जगह भरा है पानी

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सगड़ी के इस्माइलपुर में सिर पर बोरा लेकर घूटने भर पानी में। संवाद
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सगड़ी तहसील क्षेत्र के देवरांचल में बाढ़ का पानी तेजी से नीचे खिसकने के बाद अब ग्रामीणों के सामने बीमारी का खतरा बढ़ गया है। गांव में दूषित पानी पीने को लोग मजबूर हैं।
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इसका नतीजा है कि बड़ी संख्या में ग्रामीण वायरल बुखार, जुकाम, खांसी, खुजली से ग्रसित हो रहे हैं। अभी तक बाढ़ग्रस्त गांवों में क्लोरीन की गोली का वितरण नहीं किया गया और न ही कहीं ब्लीचिंग पाउडर व चूने का छिड़काव किया गया है।
बाढ़ का पानी जहां-तहां जमा है, गड्ढों में गंदा पानी रह गया है। इससे जगह-जगह गंदगी फैलने के साथ दुर्गंध उठने लगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी प्रभावित गांवों में अब तक क्लोरीन की गोलियां वितरित नहीं की गई हैं और न ही ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया गया है।
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इसके चलते बच्चे, बुजुर्ग और अन्य ग्रामीण बीमार पड़ रहे हैं। टेकनपुर-बदरहुआ रेगुलेटर के आसपास भी पानी जमा होने से दुर्गंध फैल रही है। ग्रामीणों को आशंका है कि दूषित पानी और गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है।

हैदराबाद में वायरल फीवर के मरीजों की भरमार
हैदराबाद बाढ़ चौकी पर तैनात डॉक्टर राकेश सिंह ने बताया कि इन दिनों वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम और खुजली के मरीज अधिक संख्या में पहुंच रहे हैं। शनिवार को हैदराबाद गांव की निधि (20), प्रतिमा (25), सुरेंद्र (40), कतवारू (30), गायत्री (45), निर्मला (40), सावित्री (30), पन्नीलाल (45), लालमन (45), अश्विनी (40), स्वामीनाथ (38) और राधेश्याम (55) समेत कई मरीजों को दवा दी गई। वहीं, बंधे के उत्तर स्थित चक्की गांव भी बाढ़ के दौरान पानी से घिरा था। ग्रामीणों के अनुसार यहां करीब एक दर्जन बच्चे बीमार हैं। अयांश (5), विराट (4), प्रिंस (7), प्रेम (8), खुशी (7) और तृप्ति (4) समेत कई बच्चे वायरल फीवर से परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी पीने से बच्चों की तबीयत बिगड़ी है।
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कई बाढ़ चौकियों पर नहीं मिले डॉक्टर
ग्रामीण मुन्नी लाल ने बताया कि पहले बाढ़ का पानी उतरने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में पहुंचती थीं। क्लोरीन की गोलियां बांटने के साथ ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जाता था, लेकिन इस बार अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। वहीं, महुला, गांगेपुर, हाजीपुर, जमुआरी और इस्माइलपुर की बाढ़ चौकियों पर ग्रामीणों को डॉक्टर और कर्मचारी नहीं मिले। केवल हैदराबाद बाढ़ चौकी पर डॉक्टर मरीजों को देखते मिले। ग्रामीणों का कहना है कि इलाज की सुविधा न मिलने से नाव के जरिये बंधे पर आने वाले मरीज झोलाछापों के चंगुल में फंस रहे हैं या फिर उन्हें इलाज के लिए आठ से 15 किलोमीटर दूर रौनापार जाना पड़ रहा है। इससे बाढ़ प्रभावित लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

बैराजों से 5.14 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा, सरयू के घटते जलस्तर की रफ्तार थमी
लाटघाट। गिरिजा, शारदा और सरयू बैराज से पिछले 48 घंटे में 5.14 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद सरयू नदी के घटते जलस्तर की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ गई है। बैराजों से शुक्रवार को 2,58,325 क्यूसेक और शनिवार को 2,56,106 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। लगातार पानी छोड़े जाने के कारण शनिवार की सुबह से नदी के जलस्तर में हो रही कमी पर लगाम लग गई। हालांकि, पिछले 24 घंटे में जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। बदरहुआ नाले पर शुक्रवार की शाम चार बजे जलस्तर 70.82 मीटर दर्ज किया गया था। शनिवार को इसमें चार सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई और जलस्तर 70.78 मीटर तक पहुंच गया। इसी तरह डिघिया नाले पर शुक्रवार को जलस्तर 70.12 मीटर था, जो शनिवार को आठ सेंटीमीटर घटकर 70.04 मीटर हो गया। डिघिया नाले का न्यूनतम जलस्तर 68.90 मीटर, खतरा बिंदु 70.40 मीटर और अधिकतम जलस्तर 72.59 मीटर निर्धारित है। शनिवार को यहां जलस्तर 70.04 मीटर रहा, जो खतरे के निशान से महज 36 सेंटीमीटर नीचे है। वहीं, बदरहुआ नाले पर न्यूनतम जलस्तर 70.25 मीटर, खतरा बिंदु 71.68 मीटर और अधिकतम जलस्तर 73.52 मीटर है। शनिवार को यहां जलस्तर 70.78 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 90 सेंटीमीटर नीचे है।

चारे की फसलें पानी में डूबीं, नाव से हरा चारा ला रहे ग्रामीण
सगड़ी तहसील क्षेत्र के उत्तर में बहने वाली सरयू नदी का जलस्तर घटने के बाद भी ग्रामीणों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। पशुओं के चारे की समस्या के साथ आवागमन भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। शनिवार को इस्माइलपुर, बेलहिया ढाला, अजगरा और मानिकपुर में नावों का संचालन जारी रहा। ग्रामीण जरूरी काम के लिए नाव से ही आवाजाही करने को मजबूर हैं। निबियहवा के पास बाजरा की फसल पानी में डूबी हुई है। वहीं गन्ने के खेतों में भी पानी जमा होने से किसानों को नुकसान की चिंता सता रही है। उधर, शनिवार सुबह आठ बजे घाघरा का जलस्तर स्थिर हो जाने से ग्रामीणों में एक बार फिर बाढ़ लौटने की आशंका पैदा हो गई है।
वर्जन
बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के लिए मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई है। इसकी समीक्षा की जा रही है कि कहीं-कहां टीमें नहीं पहुंची हैं। जहां नहीं पहुंची हैं वहां जाएंगी और गांवों में क्लोरीन की गोली का वितरण, छिड़काव आदि कराया जाएगा। डॉ. एनआर वर्मा, सीएमओ।

संपर्क मार्गों पर कमर तक पानी, स्कूली बच्चों की बढ़ी परेशानी
सरयू का पानी घटा, लेकिन दुश्वारियां बरकरार, तीन महीने तक बाढ़ से जूझते हैं ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
महाराजगंज। महुला-गढ़वल बांध से उत्तर बहने वाली सरयू नदी का जलस्तर भले ही कम हो गया हो, लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की दुश्वारियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। गांवों के आसपास तालाब, पोखरे और निचले खेतों में अब भी पानी जमा है। इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक दवा का छिड़काव नहीं कराया गया है। पानी कम होने के बाद सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का खतरा भी बढ़ गया है। शिवनाथ यादव और हरिराम यादव ने बताया कि रात में बिजली कटने पर अंधेरे में जहरीले जीवों का डर बना रहता है। वहीं खेतों में बाजरा पानी में डूबकर सड़ रहा है, जो पशुओं के खाने लायक नहीं बचा है। भूसा भी धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। इससे पशुपालकों के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ का पानी अभी भी चकरोड और संपर्क मार्गों पर बह रहा है। ग्रामीणों को घुटने भर पानी में पैदल आवागमन करना पड़ रहा है। जहां पानी कमर से ऊपर है, वहां नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। जमुनिहवा, अराजी मलह पुरवा, महाजी और कुढ़ई गांव के संपर्क मार्गों पर अब भी पानी जमा है। महाजी के ग्रामीण नाव से आवागमन कर रहे हैं, जबकि मलहय पुरवा के लोग पानी में पैदल चलकर आने-जाने को मजबूर हैं। जमुनिहवा के आदित्य, भैरव, आनंद और दीपक ने बताया कि उनका स्कूल करीब चार किलोमीटर दूर है। चिकनहवा ढाला के पास रास्ते में पुल का केवल पावा खड़ा है, उसकी छत नहीं पड़ी है। बांस-बल्ली के सहारे बने अस्थायी रास्ते से गुजरने में डर लगता है।

बाढ़ का पानी भले ही कम हो गया हो, पर लोगों की समस्याएं कम नहीं हुई हैं। अभी तक कहीं भी क्लोरीन की गोली का वितरण तक नहीं किया गया। अयोध्या यादव, पूर्व प्रधान सहदेवगंज।

गांवों में जगह-जगह पानी जमा रहने से बीमारी और दुर्गंध फैल रही है। पशुओं में खुरपका रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है। जय प्रकाश निषाद, जमुनियहवां।

हर वर्ष करीब तीन महीने बाढ़ की समस्या रहती है। बीमारी की स्थिति में मरीज को दो किलोमीटर दूर बांध तक पैदल ले जाना पड़ता है। अजीत निषाद, जमुनियहवां।

कई जगह पानी कमर से ऊपर है और प्रशासन की नाव नहीं होने से ग्रामीण निजी नाव या पैदल पानी में चलकर आवागमन कर रहे हैं। गिरजा देवी, महाजी।

सगड़ी के इस्माइलपुर में सिर पर बोरा लेकर घूटने भर पानी में। संवाद

सगड़ी के इस्माइलपुर में सिर पर बोरा लेकर घूटने भर पानी में। संवाद

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