फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वीबीजी-रामजी : चंद चहेती पंचायतों पर मेहरबानी, 383 गांवों को नहीं मिली फूटी कौड़ी

विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में वीबीजी-रामजी योजना के तहत भुगतान में भारी असमानता सामने आई है। एक जुलाई से लागू योजना में ग्राम पंचायतों में विकास और रोजगार से जुड़े कार्यों के लिए धनराशि जारी की जा रही है, लेकिन भुगतान का वितरण समान रूप से नहीं हो रहा है।
विज्ञापन

स्थिति यह है कि जिले की 383 ग्राम पंचायतों को 21 सितंबर तक एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है। वहीं, कुछ चुनिंदा ग्राम पंचायतों में 25 से 30 लाख रुपये तक का भुगतान किया जा चुका है।
मनरेगा की जगह एक जुलाई से लागू वीबीजी-रामजी में कई बदलाव किए गए हैं। इसमें रोजगार के दिन बढ़ाकर 100 की जगह 125 दिन कर दिए गए हैं। वहीं मनरेगा में श्रम-सामग्री मद की तर्ज पर वीबीजी-रामजी में केंद्र और राज्य सरकार का धनावंटन भी 60:40 के अनुपात में कर दिया गया है।
विज्ञापन

पहले मनरेगा में 90 फीसदी धन केंद्र सरकार देती थी। कभी-कभी धनराशि जारी होने में देरी के चलते कई माह मजदूरी के भुगतान में लग जाते थे। वीबीजी-रामजी में इसका सरलीकरण कर दिया गया, ताकि मजदूरी के भुगतान में लेटलतीफी न हो और ज्यादा से ज्यादा जॉबकार्ड धारकों को रोजगार मिलता रहे।
इधर, एक जुलाई से लागू वीबीजी-रामजी पर विकास खंडों की चहेती ग्राम पंचायतों की नजर पड़ गई। फिर क्या, एक-एक ग्राम पंचायत पर ब्लाकों की रहमत बरसी कि दो माह में ही चार-चार, पांच-पांच पोखरों की स्वीकृति देते हुए धड़ाधड़ भुगतान कर दिए गए। आलम यह हो गया कि 383 ग्राम पंचायतें ऐसी रहीं कि उन्हें एक फूटी कौड़ी तक नसीब न हो सकी और उनके चहेते लखपति बन गए।

100 से अधिक पंचायतों को एक लाख भी नहीं
जिले में 100 से अधिक ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिन्हें अब तक एक लाख रुपये से कम का भुगतान हुआ है। जबकि दूसरी तरफ कुछ पंचायतों को 25 से 30 लाख रुपये तक की धनराशि जारी की जा चुकी है। भुगतान के इस अंतर को लेकर ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि योजना का लाभ सभी ग्राम पंचायतों को जरूरत और स्वीकृत कार्यों के आधार पर समान रूप से मिलना चाहिए। इसमें कुछ ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिन्हें महज 5 से 10 हजार रुपये तक ही अभी मिले हैं।

383 पंचायतों में काम पर असर
धनराशि नहीं मिलने से 383 ग्राम पंचायतों में योजना के तहत प्रस्तावित कार्यों पर असर पड़ा है। इन पंचायतों में मजदूरों को रोजगार देने के साथ ही गांवों में कराए जाने वाले विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्राम पंचायतों का कहना है कि जब तक धनराशि उपलब्ध नहीं होगी, तब तक स्वीकृत कार्यों को धरातल पर उतारना मुश्किल होगा।


अतरकच्छा को 30 लाख तो गजहड़ा को 25.56 लाख दिए
जिले के अजमतगढ़ ब्लाक की अतरकच्छा ग्राम पंचायत में एक साथ पांच पोखरा व एक बाहा खोदाई की स्वीकृति दी गई। इसमें अभी तक 30 लाख रुपये का भुगतान कर भी दिया गया है। इसी तरह सठियांव की गजहड़ा ग्राम पंचायत में पांच चकरोड़ और एक बाहा खोदाई के नाम पर 25.56 लाख रुपये, हरैया ब्लाक के बाढ़ग्रस्त गांव देवारा खास राजा में सात बंधी कार्य और दो पौधरोपण कार्य पर 24.25 लाख रुपये का अभी तक भुगतान किया गया है। जहानागंज के किशुनपुर ग्राम पंचायत में तीन पोखरों की खोदाई पर 24 लाख, कुंजी में दो चकबंध और दो पोखरा खोदाई के नाम पर 23.89 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया है।


ब्लॉकवार शून्य भुगतान वाली ग्राम पंचायतों की संख्या
जहानागंज 16, अहरौला 12, अजमतगढ़ 71, बिलरियागंज 44, हरैया 05, कोयलसा 04, लालगंज 15, महाराजगंज 02, मार्टीनगंज 03, मेंहनगर 13, मीरजापुर 29, मोहम्मदपुर 13, पल्हना 03, पल्हनी 11, पवई 07, फूलपुर 07, रानी की सराय 19, सठियांव 04, तहबरपुर 35, तरवां 44, ठेकमा 26।

बारिश के दौरान सभी ग्राम पंचायतों में पौधरोपण कराना मुख्य लक्ष्य था। इसमें एक तो हरियाली का कारवां बढ़ता है, दूसरे जाबकार्ड धारकों को रोजगार भी मिलता है। बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों को भुगतान न होना घोर लापरवाही का द्योतक है। इसकी जांच कराई जाएगी। -रामबाबू त्रिपाठी, संयुक्त आयुक्त विकास।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें