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वाराणसी टीम ने रामलीला का मंचन कर महोत्सव में लगाया चार चांद

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आजमगढ़ महात्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार। - फोटो : AZAMGARH
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आजमगढ़। नगर के जजी मैदान में सोमवार को तीन दिवसीय आजमगढ़ महोत्सव 2019 का रंगारंग आगाज हुआ। महोत्सव का शुभारंभ डीएम की मौजूदगी में डा. कन्हैया सिंह, पंडित अमरनाथ तिवारी, डा. दीपक सहाय, स्व. ईएल दास के परिजन वर्तिका, कृष्टि व उनकी माताजी, शहीद परिजन ललिता देवी, प्रोफेसर प्रभुनाथ मयंक, पालिकाध्यक्ष शीला श्रीवास्तव, शफीकुर्रहमान मुबारकपुर, चूना देवी निजामाबाद द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। महोत्सव के लिए जजी मैदान को ग्रामीण परिवेश की तर्ज पर बनाया गया है। जिसमें झोपड़ी आदि के रूप में प्रदर्शित किया गया है और दीवालों पर चित्रकारी भी की गयी है जो लोगों के आकर्षण का केंद्र है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ गणेश वंदना के साथ हुआ। इस दौरान आजमगढ़ थीम सांग पर आधारित डांस तपस्या क्रिएटिव स्कूल की छात्राओं द्वारा प्रस्तुति की गयी। इसके बाद हरिहरपुर घराना के 25 वर्ष से कम उम्र के कलाकारों द्वारा कार्यक्रम की प्रस्तुति की गयी। साथ ही समूह नृत्य, गायन, प्राथमिक व उच्च स्तर के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की गयी। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए सभी का मन मोह लिया। जजी मैदान में ही दिव्यांग बच्चों की चित्रकारी प्रतियोगिता, रंगोली, चित्रकला, मेंहदी प्रतियोगिता, चित्रकला प्रदर्शनी, फोटोग्राफी प्रदर्शनी, बैलून प्रतियोगिता आयोजित हुई। जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केद्र के तहत साड़ी, बिंदी के स्टॉल, उप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों द्वारा मेटल वर्क, दरी, कालीन सॉफ्ट ट्वाय, सजावटी सामान, अगरबत्ती, सेनेटरी पैड, सत्तु, मसाला, क्राफ्ट, टैडी बीयर, सूक्ष्म अल्पाहार, चप्पल, सिल्क साड़ी आदि विभिन्न उत्पादों के स्टाल लगाए गए हैं जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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विलुप्त हो रही विधाओं को पुर्नजीवित करने की जरूरत
आजमगढ़। महोत्सव के शुभारंभ के बाद लोगों को संबोधित करते हुए डीएम ने कहा कि आजमगढ़ महोत्सव का उद्देश्य सूदूर तथा ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को मंच मिले। देवारा खास प्राथमिक विद्यालय के बच्चों द्वारा मलखंभ खेल का प्रदर्शन किया गया जो काफी रोमांचकारी रहा।लोक विधा में कजरी, नात, चैता, फॉग, सोरठी, कहरवा, धोबिया, बिरहा, पचरा, जांघिया, सोहर आदि विधाएं लुप्त हो रही है। आज हमें इसे पुनर्जीवित करने की जरूरत है। उन्होंने आम जनता से अपील किया कि इस तरह के कार्यक्रम कराते रहने की आवश्यकता है। यह आयोजन कलाकारों और दर्शकों का है। इसकी रूपरेखा यहां के शिक्षकों, छात्रों और कलाकारों ने तय की।
दिव्यांग कलर प्रतियोगिता के प्राथमिक वर्ग में विजय ने मारी बाजी
आजमगढ़। कार्यक्रम स्थल पर ही विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया है। जिसमें दिव्यांग कलर प्रतियोगिता के प्राथमिक वर्ग में विजय यादव प्रथम, बिन्नी जायसवाल द्वितीय और विपुल यादव ने तृतीय स्थान हासिल किया। जूनियर वर्ग में अंशू यादव प्रथम, रूपाली द्वितीय और अभिषेक यादव ने तृतीय स्थान हासिल किया। बैलून प्रतियोगिता में दृष्टिबाधित छात्राओं में निखिल प्रजापति प्रथम, गुंजन चौहान द्वितीय और विक्रेश ने तृतीय स्थान हासिल किया। समूह नृत्य में प्राथमिक वर्ग में प्राथमिक विद्यालय अवांव प्रथम, बरजी द्वितीय स्थान पर रहा। जबकि कोयलसा और भरथही तीसरे स्थान पर रहे। सभी स्कूलों को प्रमाणपत्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।
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शाम को बनारसी कलाकारों ने बांधा समां
आजमगढ़। महोत्सव की पहली शाम बनारस से आए अभिषेक पांडेय ने अपनी गायकी से समां बांधा। उन्होंने फिल्मी गीतों की धुन पर पुराने भक्ति गीतों की प्रस्तुति कर लोगों को झूमने के लिए विवश कर दिया। इसके बाद वाराणसी से ही आई कलाकारों की टीम ने रामलीला की प्रस्तुति कर सभी का मन मोह लिया।

आजमगढ़ महोत्सव में बस्तर बैंड की प्रस्तुति देते कलाकार।- फोटो : AZAMGARH

आजमगढ़ महात्सव का शुभारंभ करते डीएम एनपी सिंह और कलाकार।- फोटो : AZAMGARH

आजमगढ़ महात्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार।- फोटो : AZAMGARH

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