शहर के बवाली मोड़ पहुंचे विशाखापट्नम से साइकिल से आए लोग।
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आजमगढ़। कोरोना संक्रमण ने प्रवासी मजदूरों का काफी बुरा हाल कर दिया है। एक तो रोजीरोटी छीन गई है तो वहीं पेट की भूख शांत करने का जब कोई जुगाड़ नहीं नजर आया तो ये प्रवासी मजदूर घर लौटने को मजबूर हो उठे। जिसे जो व्यवस्था मिली वह उसी से अपने घर को चल पड़ा। ऐसे ही दो युवक विशाखापट्टनम से साइकिल से चले और रविवार को शहर के बवाली मोड़ पर पहुंचे। यहां वे गोरखपुर जाने के लिए रास्ता पूछे, कुछ देर आराम किए और फिर गंतव्य की ओर साइकिल से ही बढ़ गए।
गोरखपुर का रहने वाला भोला काफी दिनों से विशाखापट्टनम में रह कर काम करता था। जनवरी में उसका मित्र विकास भी विशाखापट्टनम काम की तलाश में पहुंच गया। अभी विकास को कोई काम मिला भी नहीं था कि लॉक डाउन की घोषणा हो गई। इसके चलते काम ठप हो गया। जमापूंजी के बल पर कुछ दिनों तक तो दोनों दोस्तों ने काम चलाया लेकिन कब तक चलाते। पैसा खत्म होने लगा और काम का कोई इंतजाम होता नजर नहीं आया तो घर वापसी का रास्ता ही समझ में आया। हाल यह थे किराए भर के पैसे दोनों के पास मौजूद नहीं थे और वहीं साधन भी नहीं मिल रहा था। जिस पर दोनों ने साइकिल से ही घर निकलने का निर्णय ले लिया और साइकिल चलाते हुए रविवार को दोनों जिले में पहुंचे। बवाली मोड़ पर बैठ कर कुछ देर आराम किया फिर गोरखपुर का रास्ता पूछ कर आगे बढ़ गए।