सरायमीर। इंडोनेशिया में पले-बढ़े और अब वहीं पर व्यापार करने वाले दो सगे भाई अपने लोगों की तलाश में 18 अक्तूबर को सरायमीर थाने के पैतृक गांव मंजिरपट्टी पहुंचे। फेसबुक के जरिए गांव के युवक से उनकी दोस्ती होने पर घर वालों के विषय में जानकारी हुई थी। अपने गांव के विदेशी नागरिकों का गांव वालों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।
सरायमीर थाने के मंजिरपट्टी गांव निवासी मो. फरीद की शादी हो चुकी थी और उनका एक बेटा मो. अबुलजैश हैं। करीब 80 साल पहले फरीद रोजी-रोटी के चक्कर में इंडोनेशिया चले गए। वहां उसने दूसरी शादी कर ली। जिससे दो बेटे ताजुद्दीन और कमालुद्दीन पैदा हुए। 1975 में फरीद अपने घर आए और करीब सात माह तक यहीं पर रह गए। इंडोनेशिया लौटने के वक्त बीमारी के चलते उनकी मौत हो गई। मो. फरीद की मौत के बाद इंडोनेशिया में उनके दोनों बेटे मां के साथ रह रहे थे। दोनों का अपना-अपना व्यापार है। दोनों भाईयों को अपने पिता और गांव वालों के विषय में जानने की जिज्ञासा थी। वे दोनों सिर्फ इतना जानते थे कि उनके गांव का नाम मंजिरपट्टी है। करीब दो माह पूर्व ताजुद्दीन ने फेसबुक पर मो. सालीम के फेसबुक एकाउंट पर गांव का नाम मंजिरपट्टी था। यह जानने के बाद ताजुद्दीन मो. सालीम से बात करते हुए पूरा हुलिया और जानकारी दी। इस दौरान पता चला कि इनका घर मंजिर पट्टी में ही है। घर की पूरी जानकारी और पता जुटाने के बाद दोनों भाई गांव घूमने के लिए आतुर थे। 18 अक्तूबर को दोनों लोग इंडोनेशिया से अपने घर पहुंचे। गांव के लोग दोनों भाईयों का गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों भाई गांव सहित आसपास के प्रसिद्ध स्थलों का भ्रमण करने के बाद बुधवार को वाराणसी पहुंचकर गंगा घाट आदि घूमकर देर रात को घर पहुंचे। दोनों भाई जब से गांव में आए हैं। इनके मिलने वालों का तांता लगा हुआ है।