आजमगढ़। जनपद में वाराणसी-लुंबिनी नेशनल हाईवे 233 का निर्माण वर्ष 2015-16 में सपा सरकार के समय शुरू हुआ था। 177 किमी लंबे हिस्से के लिए 144 गांव के किसानों से लगभग 400 हेक्टेयर भूमि खरीदी गई थी। इसको तीन पैच में तैयार कर अप्रैल 2020 तक उपयोग के लिए जनता को पूर्ण रूप से समर्पित करने की योजना बनाई गई थी। लेकिन कार्यदायी संस्था की लापरवाही के कारण निर्धारित समय पर इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका है।
एनएच-233 वाराणसी से शुरू होकर आजमगढ़ में गोमाडीह, बूढनपुर, अतरौलिया होते हुए लुंबिनी को जा रही है। जनपद में इसकी लंबाई लगभग 177 किमी है, जिसका कार्य प्रगति पर है। जनपद में दो कंपनियों की ओर से इसका निर्माण किया जा रहा था। इसमें एक कंपनी दिलीप बिल्डकान अपना काम पूरा कर चुकी है। दूसरी कंपनी गायत्री प्रोजेक्ट का कार्य अभी बाकी है। शहर से सटे कम्हेनपुर गांव के पास से मुहम्मदल्ला तक सड़क अभी निर्माणाधीन है। वहीं रानी की सराय क्षेत्र के मझगांव के पास रेलवे ट्रैक को पार करने के लिए ओवर ब्रिज बनाया जा रहा है। इसी प्रकार कई जगहों पर अभी कार्य अधूरे पड़े हैं। जबकि जनपद में 177 किमी लंबे वाराणसी-लुंबिनी एनएच-233 को तीन पैच में तैयार कर अप्रैल 2020 तक उपयोग के लिए जनता को पूर्ण रूप से समर्पित करने की योजना बनाई गई थी। इसमें कार्यदायी संस्था को एक पैच दिसंबर, दूसरा फरवरी और तीसरा अप्रैल तक तैयार कर देना था। कंपनी द्वारा लापरवाही करने के कारण अभी तक इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका है।
गायत्री प्रोजेक्ट को तीन पैच में पूरा करना था निर्माण
आजमगढ़। कार्यदायी संस्था गायत्री प्रोजेक्ट को हाईवे की निर्माण तीन पैच में पूरा करने के निर्देश दि6ए गए थे। इसमें बूढ़नपुर से ब्रह्मस्थान तक का पैच संस्था को दिसंबर माह में पूरी तरह तैयार करना है। ब्रह्मस्थान से गोसाईं की बाजार तक का पैच संस्था को 30 अप्रैल तक तैयार करना था। गोसाईं की बाजार से कंजहित तक का पैच संस्था को 28 फरवरी तक तैयार करना था। इस मामले में जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित जो भी मामले लंबित हैं उनके जिम्मेदार अधिकारियों संग बैठक कर लंबित पड़ी योजनाओं को पूरा कराया जाएगा।