आजमगढ़। बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रहे निजी वाहनों के खिलाफ भले ही अभियान चल रहा हो, लेकिन वे बेखौफ हैं। नियमों को ताख पर रखकर बच्चों को भूसे की तरह भरकर सड़क पर ये वाहन दौड़ रहे हैं। कारण कि परिवहन विभाग वाहनों का सिर्फ चालान करने व वाहन स्वामियों को नोटिस जारी करने तक ही सिमित रह गई। ऐसे में इनसे कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। बड़ी संख्या में निजी वाहन हैं।
गाजियाबाद में हुए बच्चे की मौत के बाद परिवहन विभाग जागा और स्कूली वाहनों की फिटनेस जांचने के लिए अभियान शुरू किया गया। इससे पहले न तो अभियान चलाया गया न ही वाहनों की फिटनेस की जांच की गई। केवल अनफिट वाहनों को नोटिस भेज दिया जाता था, यही वजह रही कि धड़ल्ले से अनफिट वाहनों का संचालन होता रहा। इन वाहनों की फिटनेस खत्म होने के साथ ही विंडो ग्रिल, अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बाक्स भी नहीं थे। बच्चों को भी भूसे की तरह भरकर ले जाया जाता रहा। हालांकि अभियान चलने के बाद इनमें से काफी संख्या में चालान किए गए, लेकिन वाहनों को सीज नहीं किए गए। जिसके कारण अभी भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर वाहनों का संचालन बंद नहीं हुआ है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में 1853 स्कूली वाहन हैं, लेकिन इस अभियान के चलने से पहले 778 वाहन अनफिट चल रहे थे। कुछ ने फिटनेस तो करा ली लेकिन अभी भी 500 से अधिक स्कूली वाहन हैं, जिनकी फिटनेस नहीं हो सकी है। इसके पीछे स्कूलों को संचालित करने वाले जिम्मेदार तो जवाबदेह हैं ही, साथ ही परिवहन विभाग भी कम जिम्मेदार नहीं है। एआरटीओ प्रशासन सतेंद्र कुमार यादव ने बताया स्कूली व निजी वाहनों के विरुद्ध अभियान जारी है। अलग-अलग क्षेत्रों में आरटीओ का प्रवर्तन दस्ता जांच कर रहा है। जो भी वाहन सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते पाए जा रहे हैं, उन पर कार्रवाई की जा रही है।