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Azamgarh News: मुख्यालय 45 किमी दूर पर तय करने पड़त हैं 115 किलोमीटर, गांव स्तर पर ही कर लेते हैं विवाद का समाधान

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सेमरी गांव ​स्थित स्कूल। संवाद
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सगड़ी तहसील क्षेत्र के उत्तर में घाघरा नदी के दक्षिण तथा गोरखपुर जनपद की सीमा से सटा ग्राम पंचायत सेमरी आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।
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जिला मुख्यालय से सीधे इस गांव की दूरी लगभग 45 किमी है, लेकिन लोगों को 110-115 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। तहसील मुख्यालय से सीधे इस गांव की 25 से 30 किमी दूरी है, लेकिन लोगों को घूमकर जाने पर 65 से 70 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।
जिले के मुख्यालय और तहसील आने-जाने में लोगों का पूरा दिन बीत जाता है और घर पहुंचते-पहुंचते रात हो जाती है। ग्राम पंचायत सेमरी के अंतर्गत शाहपुर, लोहरैया, चंदरहा और पहाड़पुर राजस्व गांव आते हैं।
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ग्राम प्रधान दशरथ निषाद ने बताया कि गांव में उत्पन्न होने वाली अधिकांश छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान पंचायत स्तर पर ही कर लिया जाता है। उन्होंने कहा कि मुख्यालय की दूरी और आवागमन की कठिनाइयों के कारण लोग शिकायत दर्ज कराने से भी बचते हैं। ऐसे में ग्राम पंचायत ही ग्रामीणों के लिए न्याय और समाधान का सबसे बड़ा माध्यम है। सेमरी गांव में करीब तीन साल में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई।
पंचायत की कुल आबादी 1300 से अधिक है, जिसमें लगभग 900 लोग मूल गांव में रहते हैं, जबकि करीब 400 लोग घाघरा नदी की कटान के कारण विस्थापित होकर कटया और बसाई बांध पर रहने को मजबूर हैं। सेमरी गांव में 105 मकान हैं, जबकि लोहरैया और चंदरहा के लगभग 60 परिवार बांध पर विस्थापित जीवन बिता रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, वे लोग प्रतिवर्ष बाढ़ की विभीषिका झेलते हैं। वर्तमान में भी गांव चारों तरफ से पानी से घिरा हुआ है, लेकिन अभी बीमारियों की रोकथाम के लिए किसी दवा का छिड़काव नहीं कराया गया है।
सबसे बड़ी समस्या प्राथमिक विद्यालय तक पहुंचने की है। विद्यालय के रास्ते में स्थित नाला (बाहा) में जलभराव होने से बरसात के दिनों में बच्चों का स्कूल जाना लगभग असंभव हो जाता है। फिलहाल बच्चों की पढ़ाई पंचायत भवन सेमरी में कराई जा रही है।
ग्राम प्रधान दशरथ निषाद ने बताया कि करीब डेढ़ से दो वर्ष पहले विद्यालय मार्ग पर पुलिया निर्माण की मांग की गई थी, लेकिन आज तक स्वीकृति नहीं मिल सकी। अधिकारियों ने मनरेगा से कार्य कराने की सलाह दी, जबकि इस प्रकार का निर्माण मनरेगा से संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि जिला और तहसील मुख्यालय से अत्यधिक दूरी होने के कारण सेमरी तक सरकारी योजनाओं का लाभ भी देर से पहुंचता है। प्रधानमंत्री आवास योजना, शौचालय, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित अन्य योजनाओं का क्रियान्वयन अपेक्षित गति से नहीं हो पाता। संवाद
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चुनावों में प्रशासन को भी करनी होती है मशक्कत
सरयू नदी के दूसरे किनारे पर यह गांव स्थित है। इसके कारण लोकसभा चुनाव हो, विधानसभा चुनाव हो या फिर पंचायत चुनाव, प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इस गांव के लिए प्रशासन को अलग से पोलिंग पार्टी रवाना करनी पड़ती है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि पोलिंग पार्टी सबसे पहले छोड़ी जाती है। पोलिंग पार्टी सुबह यहां से निकलकर शाम को गांव में पहुंचती है। गांव में चुनाव संपन्न कराने के बाद सबसे देर से स्ट्रांग रूम तक पहुंचती है।
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बोले लोग
नदी के दूसरी तरफ होने के कारण कोई हमारी सुधि नहीं लेता है। इससे तो अच्छा था कि हमें गोरखपुर जनपद से जोड़ दिया जाता। कम से कम कोई तो हमारी सुविधा का ध्यान लेता। -लालधारी
वर्तमान में बरसात का मौसम है और पूरा गांव पानी से घिरा है। बच्चों के स्कूल भी बंद हैं, लेकिन अभी तक कोई प्रशासनिक सहायता हमारे पास नहीं पहुंची है। -प्रमोद
अगर हम लोग जिला मुख्यालय जाने की सोचें तो सबसे पहले गोला बाजार जाकर वहां से बस पकड़नी पड़ती है। अगर सीधे जाने का रास्ता होता तो काफी आसानी होती। -रामजीत
गर्मी के दिनों में हम लोग नाव से नदी को पार कर लेते हैं। लेकिन बरसात में समस्या खड़ी हो जाती है। इसके कारण गांव के मामलों को हम गांव में सुलह-समझौते के आधार पर सुलझा लेते हैं। -शंकर निषाद।
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सेमरी गांव को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा और राजस्व कर्मी को भेज कर वर्तमान में जो भी आवश्यकता है, उस जरूरत की चीज को उपलब्ध कराने और समस्या को दूर करने का पूरा प्रयास किया जाएगा। दूरी के कारण वहां के लोग वंचित न हों, इसके लिए संबंधित विभाग को भी कहा जाएगा। -संजीव कुमार राय, एसडीएम सगड़ी।
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