आजमगढ़। जनपद में उच्च आलिया स्तर के मदरसे अब न तो कामिल और फाजिल की पढ़ाई करा सकते और न ही उनकी परीक्षाएं ही आयोजित करा सकते हैं। मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार ने आदेश जारी कर दिया है। इससे जनपद के 1000 से अधिक कामिल और फाजिल के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी। यह छात्र किस विश्वविद्यालय के संबद्ध किए जाएंगे। इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है।
जनपद में मान्यता प्राप्त 66 आलिया और उच्च आलिया स्तर के मदरसों में मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल और फाजिल की तालीम दी जाती है। करीब 25 उच्च आलिया स्तर के मदरसों में कामिल और फाजिल के करीब 1200 छात्र थे। उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड द्वारा कामिल और फाजिल जैसे उच्च शिक्षा की परीक्षाएं आयोजित कराने के बाद पास होने पर छात्रों को उच्च शिक्षा की डिग्री दी जाती है, लेकिन बीते पांच नवंबर 2024 को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004 को वैध बताते हुए इस फैसले को संविधान के खिलाफ बताने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त मदरसे कामिल, फाजिल जैसी उच्च शिक्षा की डिग्री नहीं दे सकते। यह यूजीसी अधिनियम के विपरीत और असंवैधानिक है। कोर्ट का फैसला आने के दो माह बाद मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार ने जिला अल्पसंख्यक अधिकारियों को आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त व अनुदानित उच्च आलिया स्तर के मदरसों में कामिल, फाजिल की न तो कक्षाएं संचालित की जा सकतीं और न ही परीक्षाएं ही आयोजित की सकती हैं। कोर्ट के फैसले के बाद जनपद के करीब 1000 छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है क्योंकि, अभी तक इन छात्रों की किसी भी विश्वविद्यालय से संबंद्ध नहीं किया जा सका है।
मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार का पत्र आया है। इसमें उच्च न्यायालय के आदेशों का अनुपालन कराने को कहा गया है। जिले के सभी मदरसों को पत्र भेजा गया है। मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त व अनुदानित उच्च आलिया स्तर के मदरसे अब न तो कामिल, फाजिल की पढ़ाई करा सकते और न ही परीक्षाएं ही आयोजित करा सकते हैं। - वर्षा अग्रवाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी