ठंड का मौसम शुरू हो चुका है लेकिन परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अभी तक बैठने के लिए फर्नीचर उपलब्ध नहीं हो सका है। अधिकांश प्राथमिक विद्यालयों में बच्चे ठंडे फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
इससे न सिर्फ उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है बल्कि पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित हो रहा है। शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने अब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया है।
जिले में 2706 परिषदीय स्कूल संचालित हैं। इसमें 1724 प्राथमिक, 458 उच्च प्राथमिक व 524 कंपोजिट विद्यालय हैं। हालांकि विद्यालयों के विलय के बाद कुल 2555 विद्यालय ही बचे। उक्त विद्यालयों में करीब तीन लाख बच्चे पंजीकृत हैं।
शासन से इन स्कूलों में ऑपरेशन कायाकल्प का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत बच्चों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी है। इनमें बच्चों के लिए कुर्सी-मेज की भी व्यवस्था शामिल है।
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों में सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। शहर से लेकर गांव तक अधिकतर स्कूल ऐसे हैं, जिनमें बच्चों के लिए फर्नीचर की व्यवस्था नहीं हो सकी है। विभागीय अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं है। हालांकि विभाग ने शत प्रतिशत कायाकल्प करने का दावा किया है। जबकि अभी भी 50 प्रतिशत से कम विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था नहीं हो पाई है।
प्राथमिक विद्यालय का हाल बेहाल
सरायमीर। प्राथमिक विद्यालय प्रथम सरायमीर में अब तक बेंच–डेस्क उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। बच्चे तख्त और फर्श पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। विद्यालय में शौचालय पर पानी की टंकी तक नहीं लगी है, जिससे पानी सप्लाई की समस्या बनी रहती है। प्रधानाध्यापक नीता कुमारी ने बताया कि टाउन एरिया कर्मचारी और बड़े बाबू भास्कर को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन किसी ने संज्ञान नहीं लिया। विद्यालय में कुल 151 बच्चे पंजीकृत हैं। संवाद
मार्टीनगंज ब्लॉक के विद्यालय
बरदह। मार्टीनगंज ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति खराब है, जहां कक्षा एक से पांच तक बच्चे फर्श या टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। खंड शिक्षा अधिकारी अश्वनी कुमार सिंह के अनुसार कुछ विद्यालयों में ही डेस्क-बेंच हैं, बाकी में व्यवस्था का अभाव है। संवाद
ठंड में जमीन पर बैठकर कर रहे पढ़ाई
निजामाबाद। प्राथमिक विद्यालय निजामाबाद प्रथम की स्थिति भी चिंताजनक मिली। विद्यालय में नियुक्त तीन अध्यापक और एक शिक्षामित्र मौजूद थे। कुल 103 पंजीकृत छात्रों में से 78 उपस्थित थे। किसी भी कक्षा में डेस्क-बेंच की व्यवस्था नहीं है। प्रधानाध्यापक रामदास के अनुसार शासन की ओर से अभी तक कोई धनराशि जारी नहीं हुई है, इसलिए बच्चे मजबूरी में जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं। संवाद
अब तक नहीं हो सकी फर्नीचर की व्यवस्था
जहानागंज। स्थानीय शिक्षा क्षेत्र में भी परिषदीय विद्यालयों की स्थिति बदतर है। ब्लॉक में 89 प्राथमिक विद्यालय, 19 कंपोजिट विद्यालय और 27 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। कंपोजिट और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में डेस्क-बेंच उपलब्ध हैं, लेकिन 89 प्राथमिक विद्यालयों में एक भी डेस्क-बेंच नहीं है। प्राथमिक विद्यालय शेरपुर कुटी के निरीक्षण में पाया गया कि कुल 154 बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। प्रधानाध्यापक कृष्णानंद विश्वकर्मा ने बताया कि शासन से कई बार आश्वासन मिला, लेकिन अब तक कोई फर्नीचर नहीं भेजा गया।
कायाकल्प के तहत विद्यालयों में बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था की जानी है। अब तक करीब 45 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था हो चुकी है। जिन विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था नहीं है वहां पर कराने का प्रयास किया जा रहा है।
-राजीव कुमार पाठक, बीएसए आजमगढ़।
11 प्राथमिक विद्यालय प्रथम सरायमीर में जमीन पर बैठकर पढ़ते बच्चे। संवाद
11 प्राथमिक विद्यालय प्रथम सरायमीर में जमीन पर बैठकर पढ़ते बच्चे। संवाद