आजमगढ़। गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है बरसात आने में कुछ महीने का समय शेष है लेकिन अब तक नगर से सटे इलाकों में नालों पर हुए अतिक्रमण को प्रशासन की ओर से हटाया नहीं गया है। जिसका परिणाम है कि अगर विगत वर्ष की भांति इस बार भी मुसलाधार बारिश हुई तो एक बार फिर कई मुहल्लों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ सकता है। वहीं जिला प्रशासन अभी तक तमसा के पुराने रास्तों से भी अतिक्रमण को नहीं हटा सका है।
15 जून के बाद बरसात के मौसम की शुरूआत मानी जाती है। नगर पालिका अपने क्षेत्र में नालों की साफ सफाई कराने में जुटी हुई है। लेकिन नगर से सटे मुहल्लों में प्रशासन की ओर से अब तक साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। विगत वर्ष सितंबर माह में हुई मुसलाधार बारिश के बाद नगर के कोलघाट, कोल बाजबहादुर, बागेश्वर नगर मुहल्ले बरसात के पानी में डूब गए थे। लगभग डेढ़ महीने तक 10 हजार की आबादी इस जलभराव की समस्या से जूझती रही। लेकिन फिर भी प्रशासन ने इससे सबक नहीं लिया। अभी तक इन क्षेत्रों से होकर गुजरने वाले नालों पर लोगों का कब्जा बरकरार है। न तो प्रशासन द्वारा नालों से अतिक्रमण को हटाया गया है और ना ही इनकी साफ सफाई कराई गई। वहीं तमसा नदी का पुराना रास्ता जिस पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। उसका मामला भी अब तक फाइनल नहीं हुआ जिसके कारण इस पर से भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं की जा सकी है। ऐसे में अगर फिर पिछल वर्ष की तरह बारिश हुई तो इन मुहल्लों को महीनों पानी के बीच गुजारना होगा। सबकुछ जानते हुए भी प्रशासन मौन साधे बैठा है।
पानी में करंट आने से गई थी एक युवक की जान
आजमगढ़। नगर के कोलघाट एरिया में एक युवक आरओ पानी की सप्लाई का कार्य करता थी। उसने घर में ही प्लांट लगा रखा था। पानी जमा होने से पूरा परिवार ऊपर रह रहा था। एक दिन वह घर के मोटर को चलाने के लिए नीचे पानी में उतरा। पानी में करंट होने से उसकी जान चली गई। जिसके कारण उसका पूरा परिवार ही बिखर गया।
नहीं शुरू हुआ पंप का निर्माण
आजमगढ़। पिछले वर्ष जब यह मुहल्ले बरसात के पानी में डूबे थे तो आजमगढ़ के पूर्व सांसद अखिलेश यादव ने अपनी निधि से कोलघाट में पानी के निकास के लिए एक बड़ा पंप लगवाने के लिए धन की स्वीकृति की थी। जिसके बाद भी अब तक पंप का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। जिसके कारण भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इस मामले में एडीएम सदर जेआर चौधरी ने बताया कि यह मामला नगरपालिका क्षेत्र के बाहर है। इसके लिए डीपीआरओ को कार्ययोजना और डीपीआर तैयार कर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। जैसे ही उनके द्वारा डीपीआर सबमिट किया जाता है उस पर कार्रवाई शुरू हो जाएगी।