पुरानी कोतवाली में नवरात्र के अवसर पर आयोजित श्रीरामलीला में सोमवार की रात श्री आदर्श रामलीला मंडल जनकपुर (सीतामढ़ी), बिहार के कलाकारों ने ताड़का वध, सीता जन्म, नगर दर्शन, फूलवारी और मीना बाजार प्रसंगों का मंचन किया।
भगवान की झांकी की आरती के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। माता सीता के जन्म की लीला देखकर दर्शक उत्साहित हो उठे। मंचन की शुरुआत ऋषि विश्वामित्र के श्रीराम और लक्ष्मण को लेकर ताड़का वन पहुंचने के प्रसंग से हुई।
यज्ञ की रक्षा के लिए दोनों भाई धनुष-बाण लेकर तैयार होते हैं। यज्ञ शुरू होते ही राक्षसी ताड़का वहां पहुंचकर विध्वंस करने का प्रयास करती है। इसके बाद श्रीराम ताड़का का वध कर देते हैं। इस प्रसंग के मंचन के दौरान दर्शकों ने जयकारे लगाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
इसके बाद जनकपुर में अकाल पड़ने और लोगों के भूख-प्यास से परेशान होने का दृश्य दिखाया गया। प्रजा की दुर्दशा देखकर राजा जनक ज्योतिषाचार्य से समस्या का समाधान पूछते हैं।
ज्योतिषाचार्य उन्हें सोने का हल बनवाकर खेत की जुताई करने का उपाय बताते हैं। राजा जनक उसी के अनुसार खेत जोतना शुरू करते हैं। इसी दौरान हल एक स्थान पर अटक जाता है। जमीन की खुदाई करने पर वहां एक घड़ा मिलता है, जिसमें माता सीता विराजमान होती हैं।
इस तरह सीता जन्म की लीला का मंचन किया गया। रामलीला की अगली कड़ी में नगर दर्शन, फूलवारी और मीना बाजार प्रसंगों का भी मंचन हुआ। नगर दर्शन में कलाकारों ने नगर की सुंदरता और वहां के जनजीवन को प्रस्तुत किया।
फूलवारी प्रसंग में श्रीराम और माता सीता के प्रथम मिलन से जुड़ी भावपूर्ण लीला दिखाई गई। वहीं, मीना बाजार प्रसंग ने दर्शकों का मनोरंजन किया। कलाकारों के संवाद, अभिनय और मंच सज्जा ने रामलीला को जीवंत बना दिया। देर रात तक दर्शक मंचन का आनंद लेते रहे।
रामलीला में आज
आजमगढ़। पुरानी कोतवाली पर आयोजित श्रीरामलीला में श्री आदर्श रामलीला मंडल जनकपुर (सीतामढ़ी), बिहार के कलाकार रात साढ़े सात बजे से कैकेयी कोप और श्रीराम वनवास का मंचन करेंगे।
राम जन्म होते ही जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा पंडाल
मेजवां। फूलपुर रामलीला मैदान में चल रही श्रीरामलीला के तीसरे दिन सोमवार की रात चित्रकूट से आए करुणामयी रामलीला संस्थान के कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जन्म का भावपूर्ण मंचन किया। राम जन्म होते ही पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति-भाव में डूब गए। मंचन में दिखाया गया कि राजा दशरथ की तीन रानियां होने के बावजूद उन्हें कोई संतान नहीं थी। राजगुरु के परामर्श पर राजा दशरथ ने यज्ञ कराया और तीनों रानियों को प्रसाद दिया। इसके बाद उनके घर में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। चारों राजकुमारों के जन्म की खुशी में महिलाओं ने सोहर गीत प्रस्तुत किए। इस मौके पर रामलीला समिति के अध्यक्ष सुरेश कुमार गुप्ता के साथ राहुल, अवनीश, शिवम, विशाल, सुजल जायसवाल, अंगद सोनकर, बाबी सेठ, सुनील सोनी, निवेश रावत और अंश सोनी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। संवाद
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ताड़का वध के सजीव अभिनय और भक्ति गीतों ने दर्शकों का मोहा मन
ठेकमा। जगदीशपुर सोहौली में श्रीराम रामलीला सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित रामलीला में ताड़का वध की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय से भगवान श्रीराम के पराक्रम और धर्म की स्थापना का प्रसंग प्रस्तुत किया। इस दौरान जय श्रीराम के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा। रामलीला के प्रसंग में महर्षि विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के वन में पहुंचने का दृश्य दिखाया गया। यहां ऋषि-मुनियों की तपस्या में बाधा डालने वाली राक्षसी ताड़का का भगवान श्रीराम ने वध किया। ताड़का वध और ऋषि-मुनियों को भयमुक्त करने के प्रसंग ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। ग्रामीणों ने कलाकारों के अभिनय की सराहना करते हुए रामलीला का आनंद लिया। संवाद
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राम जन्म और ताड़का वध का मंचन, जयकारों से गूंजा पंडाल
फोटो संख्या 15 -
बरदह। बाजार में चल रही रामलीला में सोमवार की रात राम जन्म और ताड़का वध का मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के जन्म का दृश्य प्रस्तुत होते ही रामलीला मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। मंचन में अंश तिवारी ने भगवान श्रीराम और उनके सगे भाई रौनक तिवारी ने लक्ष्मण की भूमिका निभाई। राजू शाह ने राजा दशरथ और पोलू तिवारी ने ताड़का का किरदार निभाया। वहीं, पन्ना शर्मा और मुंशी चमार ने साधु-संतों तथा ऋषि-मुनियों की भूमिका निभाई। रामलीला के प्रसंग के अनुसार, ऋषि-मुनि भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ वन में ले जाते हैं, जहां राक्षसी ताड़का का वध होता है। मंचन के दौरान दर्शक जय श्रीराम के जयकारे लगाते रहे। संवाद