आजमगढ़। सत्तारूढ़ होने के बाद भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी के लिए पहली बार सीधे दावा ठोकने का निर्णय लिया लेकिन जब परिणाम आया तो विजय यादव की शानदार जीत ने उसे सकते में डाल दिया। पार्टी को जोर का झटका तब लगा जब उसके समर्थन से जीते 11 वोट भी उसे हासिल नहीं हुए। बसपा के समर्थन से जीते 10 जिला पंचायत सदस्यों ने भी सपा के ही पक्ष में मतदान किया।
आजमगढ़ को सपा का गढ़ कहा जाता है। शनिवार को हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर इस धारणा को मजबूत कर दिया। सपा ने छठवीं बार इस सीट पर अपना कब्जा जमाया है। पंचायत चुनाव में सपा समर्थित 14, भाजपा समर्थित 11 और बसपा समर्थित 10 जिला पंचायत सदस्यों ने जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस के एक, एआईएमआईएम का एक, राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल का एक, अपना दल का एक, आजाद समाज पार्टी के दो और आप के एक जिला पंचायत सदस्य को जीत मिली थी। शनिवार को हुए मतदान में सपा प्रत्याशी विजय यादव को 79 मत और भाजपा प्रत्याशी को मात्र पांच वोट मिले। जाहिर है कि भाजपा के समर्थन से जीते छह जिला पंचायत सदस्यों ने भी पार्टी को धोखा दे दिया। केवल बसपा के 10 जिला पंचायत सदस्यों का ही नहीं बल्कि सपा को सर्वदलीय समर्थन हासिल हुआ। भाजपा नेता बसपा के जिला पंचायत सदस्यों के सहयोग से जीत का मंसूबा पाले हुए थे लेकिन यह टिक नहीं पाया। इससे पार्टी का सकते में आना स्वाभाविक है।