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नेताओं और अधिकारियों के यहां था अखंड का ठिकाना

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समर्पण के बाद कोर्ट से अंखड को ले जाती पुलिस। - फोटो : AZAMGARH
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आजमगढ़। अखंड प्रताप सिंह सपा, बसपा और भाजपा के कई शीर्ष नेताओं और अधिकारियों के यहां ठिकाना बना रखा था। यही कारण है कि कई पुलिस वाले भी अखंड के लिए मुखबिरी कर रहे थे। कार्रवाई के नाम पर अखंड के विरुद्ध कई बार घर की कुर्की की गई, ताकि जवाब मांगने पर पुलिस रिकार्ड दिखा सके।
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आजमगढ़ के तरवां थाने के जमुआं गांव निवासी अखंड प्रताप सिंह के विरुद्ध करीब 35 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इसमें हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, रंगदारी आदि शामिल है। वह अपने गुंडई के बल पर ही ना केवल स्वयं तरवां ब्लाक का प्रमुख रहा, बल्कि अपनी पत्नी को भी ब्लाक प्रमुख बनाया था। अखंड के सामने आजमगढ़ जिले के मेहनगर थाना के टोढ़रपुर के मूल निवासी और वाराणसी के लोहता थाना के भिटारी में रह कर लहरतारा में सत्या रोडवेज के नाम से ट्रांसपोर्ट का कारोबार करने वाले धनराज यादव चुनाव मैदान में उतरे।
धनराज यादव के बड़े भाई बच्चेलाल यादव द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार, अखंड प्रताप सिंह सहित 13 बदमाशों ने 11 मई 2013 की रात उनके छोटे भाई के वाहन पर हमला किया था। तीन स्कार्पियो सवार बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर ना केवल धनराज की हत्या की बल्कि उनकी राइफल भी लूट ली। सपा सरकार में धनराज यादव की हत्या के बाद पुलिस अखंड को गिरफ्तारी के लिए सख्ती दिखाई, लेकिन वह बचने के लिए प्रदेश सरकार के कुछ बड़े मंत्रियों की शरण में रहने लगा था। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में अतरौलिया क्षेत्र से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, उसे अदालत से पैरोल मिली थी। करारी हार के बाद अखंड चार जुलाई 2017 से पुन: पुलिस की नजर में फरार हो गया। इस बार वह भाजपा नेताओं और पुलिस के कुछ अधिकारियों के यहां शरण लिया था। कोर्ट की सख्ती के चलते वह बृहस्पतिवार को नाटकीय ढंग से समर्पण कर दिया।
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