अर्द्धसैनिक बल में नौकरी दिलाने का झांसा देकर फर्जी निवास प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कर युवाओं से ठगी करने वाले गिरोह के मुख्य आरोपी विद्यासागर ने मंगलवार को न्यायालय में सरेंडर कर दिया।
पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। आरोपी पर अपने साथियों के साथ मिलकर 10 हजार से अधिक युवाओं को नौकरी का झांसा देकर ठगी का शिकार बनाने का आरोप है।
गिरोह पर एक व्यक्ति से 10 लाख रुपये तक वसूलने का आरोप है। एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि मामले की शुरुआत 20 मई 2026 को हुई थी। रानी की सराय थाना क्षेत्र के अंधौरी गांव निवासी पंकज यादव की तहरीर पर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
विवेचना के दौरान मामले में 12 से अधिक आरोपियों के नाम सामने आए। पुलिस अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। विवेचना में रानी की सराय थाना क्षेत्र के कोईलारी खुर्द निवासी विद्यासागर और वीरेंद्र यादव के नाम भी सामने आए थे।
दोनों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। पुलिस ने वीरेंद्र यादव पर 25 हजार और विद्यासागर पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं।
इनाम घोषित होने के बाद वीरेंद्र यादव ने 31 जुलाई को न्यायालय में सरेंडर कर दिया था। अब मुख्य आरोपी विद्यासागर के भी एसीजेएम कोर्ट नंबर 10 में आत्मसमर्पण करने के बाद पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि मामले में अब तक कुल 13 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है और विवेचना जारी है।
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अरुणाचल प्रदेश के आलो थाने में भी दर्ज है ठगी की प्राथमिकी
विद्यासागर के खिलाफ कुल छह प्राथमिकी दर्ज हैं। एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि आरोपी के खिलाफ अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम सियांग जिले के आलो थाने के अलावा आजमगढ़ के थानों में भी मुकदमे दर्ज हैं। एसपी ग्रामीण ने बताया कि विद्यासागर के खिलाफ 14 अगस्त 2019 को अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम सियांग जिले के आलो थाने में ठगी की प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इस मामले में वर्ष 2020 में उसकी गिरफ्तारी हुई थी। आरोप है कि उस समय भी उसने 11 युवाओं को फर्जी निवास प्रमाणपत्र उपलब्ध कराकर नौकरी दिलाने का काम किया था। इनमें आजमगढ़ के मेंहनगर और अतरौलिया समेत अन्य थाना क्षेत्रों के युवक भी शामिल थे। इसके बाद रानी की सराय थाने में उसके खिलाफ तीन प्राथमिकी दर्ज हुईं।
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6.50 लाख की ठगी की तीन लोगों पर दर्ज कराई थी प्राथमिकी
कंधरापुर थाना क्षेत्र निवासी सुधीर यादव ने भी 6 जून 2026 को विद्यासागर समेत तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि अर्द्धसैनिक बल में नौकरी दिलाने के नाम पर उससे 6.50 लाख रुपये की ठगी की गई। पीड़ित के अनुसार कोइलारी खुर्द गांव निवासी विद्यासागर, बलिया जिले के खिजरी थाना क्षेत्र के पिपराकलां गांव निवासी मुन्ना शर्मा उर्फ मुन्ना और सेठवल निवासी वीरेंद्र यादव ने असम का फर्जी निवास प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कर उसे बीएसएफ में नौकरी दिलाई थी। बाद में अर्द्धसैनिक बल की ओर से दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया तो असम का निवास प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया। इसके बाद पीड़ित को नौकरी से बाहर कर दिया गया। मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
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इनकी हो चुकी गिरफ्तारी
पुलिस ने धोखाधड़ी करने वाले आरोपी प्रदीप यादव, राकेश यादव, राहुल कुमार, अविनाश, देवनाथ, मुन्ना शर्मा, मुन्ना पासवान, अनिल कुमार, निरंजन यादव, धर्मेंद्र गुप्ता, मुकेश गुप्ता, वीरेंद्र यादव, लालू उर्फ राकेश कुमार को गिरफ्तार किया है।