आजमगढ़। हरिऔध कला केंद्र में 25वां आजमगढ़ पुस्तक मेला चल रहा है। सातवें दिन सोमवार को पानी की पंचायत और आजमगढ़ में ग्रामीण पर्यटन की संभावना विषय पर विमर्श, कार्यशाला आयोजित हुआ।
मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित प्रसिद्ध पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह ने कहा कि जब तक हम पानी, नदी और नारी को सम्मान नहीं देंगे तब तक धरती की तस्वीर नहीं बदलेगी। बिना देर किए अपने भविष्य बनाने की जिम्मेदारी शिद्दत से निभानी होगी। इसका तीन मूल मंत्र है समझदारी, साझेदारी फिर नागरिक समाज समझेगा अपनी जिम्मेदारी। अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि धरती पर पानी है तभी जीवन संभव है। बिना पानी के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। बर्नवाल कुंद ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी यह पुस्तक मेला आयोजित होता रहा। सुनील राय ने कहा कि पानी पर सिर्फ हमारा अधिकार नही बल्कि धरती पर रह रहे असंख्य जीव जंतुओं का अधिकार है। इसलिए हमें एक बेहतर मनुष्य का व्यवहार कर सबके हक का सम्मान करना होगा।
हिमांशु ने दी गजलों की प्रस्तुति: सांध्यकालीन सत्र में हिमांशु ने कई गजल और सूफियाना संगीत की प्रस्तुति की। तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा सभागार गूंजता रहा। जब उन्होंने ताल से ताल मिलाया तो वहीं तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी पर युवा खुद मंच पर आने से नहीं रोक पाए।
संस्कृतकर्मी राजीव रंजन ने बताया कि मेले के समापन अवसर पर मंगलवार की सुबह के सत्र में पूर्वांचल का फैशन शो और दूसरे सत्र में शाम तीन बजे अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन किया जाएगा।