आजमगढ़। सेप्टिक से पीड़ित एक अर्द्घविक्षिप्त युवक को जिला अस्पताल नगर पालिका की कूड़ा गाड़ी से बाहर फिंकवाना चाहता है। लेकिन नगर पालिका ने इस अमानवीय काम में साथ देने से साफ इंकार कर दिया।
वजह थी कि सेप्टिक की वजह से सड़ गए दोनों पैर और एक हाथ से आने वाली बदबू। पांच दिन पहले अस्पताल आए युवक को एक कमरे में बंद कर दिया गया है। कमरे में उसे खाना पहुंचा दिया जाता है, लेकिन न तो उसकी मरहम पट्टी हो रही और न ही उसे दवा दी जा रही है।
उक्त 28 वर्षीय अर्द्घविक्षिप्त युवक को 108 एंबुलेंस ने पांच दिन पहले कंधरापुर क्षेत्र से लाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जब युवक अस्पताल में आया तो इसके दोनों पैर और एक हाथ सेप्टिक की चपेट में थे और बुरी तरह बदबू आ रही थी।
पहले दिन चिकित्सकों ने घाव को साफ कर इसकी मरहम पट्टी की और अस्पताल के एक कमरे में बंद कर दिया। तबसे लेकर आज तक इसकी पट्टी को दोबारा बदलने की जहमत नहीं उठाई गई। इस बीच अगर कमरे का दरवाजा खुला रह गया तो यह युवक पूरे अस्पताल में घूमने लगता है।
फिर इसे पकड़कर कमरे में बंद कर दिया जाता है। 25 और 26 सितंबर को जिले के नोडल अधिकारी प्रमुख सचिव आलोक कुमार के जनपद आगमन की संभावना है। इसे देखते हुए अस्पताल प्रशासन के हाथ पैर फूले हुए हैं।
वह इस युवक से छुटकारा पाना चाहता है। इसके लिए जिला अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने उक्त युवक को वहां से हटाने के लिए नगरपालिका ईओ को फोन कर वाहन की मांग की। लेकिन नगर पालिका ने कूड़ा गाड़ी देने से मना कर दिया।
जिला अस्पताल से मेरे मोबाइल पर फोन आया था। उनके द्वारा गाड़ी की मांग की जा रही थी। लेकिन हमने उनसे कह दिया कि नगरपालिका के पास कूड़ा उठाने वाली गाड़ी है। इसके बाद बात खत्म हो गई। दिनेश कुमार विश्वकर्मा, ईओ नगरपालिका।
मरीज की हालत काफी टिपीकल है। वह जहां रहता है वहीं पर गंदगी करता है। जिसके कारण अस्पताल में तैनात कर्मचारी और मरीज उसे यहां से हटाने के लिए कह रहे हैं। रही बात नगरपालिका से गाड़ी की मांग करने की तो वह मैंने अस्पताल से कूड़ा हटाने के लिए गाड़ी की मांग की थी। डा. जीएल केशरवानी, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक
मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। वैसे ऐसा होना तो नहीं चाहिए लेकिन मैं इस संबंध में जानकारी करता हूं। अगर ऐसा हुआ है तो गलत हुआ है। - डा. एसके तिवारी, मुख्यचिकित्साधिकारी।