बलररामपुर। ठंड बढ़ने के साथ ही नाक, कान और गले से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। मंडलीय जिला अस्पताल बलरामपुर में ईएनटी (नाक-कान-गला) रोगियों की भीड़ बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार सर्दी के मौसम में सबसे अधिक टॉन्सिलाइटिस के मरीज सामने आ रहे हैं।
मंडलीय जिला अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. धनंजय कुमार पाण्डेय ने बताया कि वर्तमान में रोजाना 70 से 80 मरीज नाक, कान और गले की समस्याओं को लेकर ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इनमें टॉन्सिल के 30 से 35 मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या 12 से 15 के बीच रहती थी। बताया कि ठंडी हवा और वायरल संक्रमण के कारण टॉन्सिलाइटिस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
ऐसे करें बचाव
बाहर निकलते समय मास्क पहनें या नाक-मुंह ढककर रखें।
बच्चे, बुजुर्ग और श्वसन रोगी सुबह व शाम बाहर जाने से बचें।
गुनगुने नमक मिले पानी से नियमित गरारे करें।
पर्याप्त मात्रा में सामान्य तापमान का पानी पिएं।
गले में तेज दर्द, सूजन, बुखार, सांस लेने में दिक्कत पर चिकित्सक से संपर्क करें।
वेंटिलेटर चलाने के लिए दिया प्रशिक्षण
बलरामपुर। जिला अस्पताल में लंबे समय से प्रशिक्षण की कमी के कारण वेंटिलेटर मशीनें संचालित नहीं हो पा रही थीं, जिससे गंभीर मरीजों की जान बचाना चुनौतीपूर्ण हो गया था। इस समस्या के समाधान के लिए शुक्रवार को लखनऊ से आई तीन सदस्यीय टीम ने अस्पताल के चिकित्सकों, स्टाफ नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को वेंटिलेटर संचालन का प्रशिक्षण दिया।
टीम में जोनल प्रोजेक्ट मैनेजर मानवेंद्र सिंह, राघवेंद्र प्रसाद शर्मा, डिविजनल मैनेजर सर्वेश यादव और अन्य स्टाॅफ शामिल थे। सायरेक्स कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर टीम जिला अस्पताल पहुंची और सभी स्वास्थ्य कर्मियों को वेंटिलेटर के संचालन की बारीकियां सिखाई गईं। प्रशिक्षण सत्र में वेंटिलेटर की विभिन्न तकनीकी जानकारियां, मरीज की स्थिति के अनुसार सेटिंग्स और आपातकालीन प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया। इससे अब मरीजों के आने पर तत्काल उनके रोग को नियंत्रित किया जा सकेगा और गंभीर मामलों में जान जोखिम कम होगी। अस्पताल प्रशासन ने इस पहल की सराहना की है। उम्मीद है कि प्रशिक्षण के बाद वेंटिलेटर सुविधा पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी, जिससे जिले के मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। संवाद