कोरोना से मारे गए लोगों को परिजनों को शासन की ओर से 50 हजार रुपये की सहायता मुहैया कराई जा रही है। शासन ऐसे जनपद के 219 लोगों की सूची जारी की है। इस सूची में कई ऐसे लोगों के नाम हैं, जिनको कोरोना तो हुआ था लेकिन मौत नहीं हुई।
कोरोना की दूसरी लहर ने बहुत से लोगों को अपनो से दूर कर दिया। बहुत से लोग असमय काल के गाल में समा गए। अस्पतालों में ऑक्सीजन और बेड की कमी के चलते तमाम लोगों को भर्ती ही नहीं किया गया। जांच के बाद मरीजों को अपने हाल पर छोड़ दिया जा रहा था। उनके इलाज की व्यवस्था नहीं थी। लिहाजा स्वास्थ्य विभाग के पास बीमारी मारे गए लोगों की पूरा आंकड़ा ही नहीं है। अब सरकार ने कोविड से मारे जाने वाले लोगों को 50 हजार रुपये का मुआवजा देने का फैसला लिया है तो स्वास्थ्य विभाग ने मनमाने तरीके से सूची जैरी कर दी। जिले में 219 लोगों की सूची जारी हुई है, जिनके परिवार वालों को मुआवजा दिया जाना है। सूची में शामिल लोगों की जांच करने पर पता चला कि उनमें से कई लोग स्वस्थ हो गए थे। जांच में मनमानी के चलते कई लोगों के नाम के साथ एक ही नंबर लिखा है तो कुछ नंबर वाराणसी के हैं।
बिलरियागंज थाना क्षेत्र के पांती खुर्द गांव निवासी फूलचंद का नाम मृतकों की सूची में है। नगर कोतवाली क्षेत्र के सिद्घार्थ नगर कालोनी निवासिनी मंजू पत्नी त्रिभुवन लाल को मृत दिखाया गया है। दोनों की नामों के आगे एक ही मोबाइल नंबर लिखा है। जब इस नंबर फोन किया गया तो पता चला कि यह वाराणसी के एक व्यक्ति मो. अजहर सिद्दीकी का है। उन्होंने बताया कि वे इस नंबर वह पांच साल से प्रयोग कर रहे हैं।
माया सिंह का नाम भी मृतकों की सूची में है। वह राजकीय मेडिकल कालेज में कार्य करती हैं। मंगलवार को उनको फोन किया गया तो फोन माया सिंह ने ही उठाया। उन्होंने बताया कि वह कोरोना पाजीटिव हुई थीं लेकिन स्वस्थ हो गई हैं। उनका कहना है कि उनके पास इस संबंध में कई फोन आ चुके हैं लेकिन वह समझ नहीं पा रही हैं कि रिकार्ड में उनकी मौत कैसे दर्ज कर दी गई है।
सीएमओ डा. आईएन तिवारी ने बताया मुझे इस संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं है। विभाग की ओर से 228 लोगों की कोरोना से मौत की सूचना शासन को भेजी गई थी। अगर जिंदा लोगों का नाम इसमें शामिल हैं, तो इसकी जांच कराई जाएगी। जो लोग जीवित होंगे या जिनका मोबाइल नंबर गलत होगा उसे दुरुस्त किया जाएगा।