फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेरे लिए किसी तीर्थ से कम नहीं है हमारे पूर्वजों की धरती: विष्णु विश्राम

विज्ञापन
विज्ञापन
आजमगढ़। पुरखों ने छोड़ा अपना गांव और देश, पुरखों की धरती को तलाश करते सियरहा गांव पहुंचे डॉ. विष्णु विश्राम अपने परिवार के लोगों से मिलकर भावुक हो गए। उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। उन्होंने कहा कि मेरे लिए हमारे पूर्वजों की धरती किसी तीर्थ से कम नहीं है।
विज्ञापन

1891 से आजमगढ़ जिले के सियरहा गांव में रहने वाले डा. विष्णु विश्राम का परिवार गुयाना चला गया था। उनकी परदादी का नाम अमरू था जिनको अंग्रेज गिरमिटिया मजदूर के रूप में गन्ने की खेती करने के लिए लेकर गए थे। मजदूर के रूप में वहां गई अमरू शादी करके वहीं बस गई। उनकी चौथी पीढ़ी के डा. विष्णु विश्राम हैं। उन्होंने जब अपने परिवार को ढूंढ़ना शुरू किया तो पाया कि उनका परिवार यूपी के गाजीपुर, राजस्थान के भरतपुर व बिहार के छपरा में भी रहता है। बुधवार को जब वह जनपद के सगड़ी तहसील के सियरहा गांव में अपने परिवार के पास पहुंचे तो लोगों से बात करते-करते भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि वह 1977 से अमेरिका के न्यूयार्क शहर में रहते हैं और लगातार भारत आते रहते हैं। गांव की मिट्टी की महक उन्हें खींच लाती है। यहां अपने परिवार के से मिलकर जो खुशी महसूस हो रही है उसे बयां नहीं कर सकता। हमारे पूर्वजों की जमीन हमारे लिए किसी तीर्थ से कम नहीं है। यही कारण है कि लगातार भारत के साथ ही गिरमिट देशों में फिजी, सूरीनाम, मारीशस की यात्रा करता रहता हूं। आगे भी हमारा यहां से संपर्क बना रहेगा।
उमेश राय का परिवार भी हुआ भावुक
अपने पूर्वजों के वंशज को इतने दिन बाद अपने बीच पाकर उमेश राय भी हतप्रभ रह गए। उनका पूरा परिवार भावुक हो गया। जिसे कभी देखा नहीं और जिसके बारे में कभी सुना भी नहीं अचानक उसके सामने आने से परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें