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कहीं विवाद तो कहीं अनाज के अभाव ने भूखा रखा

Tue, 22 Mar 2016 12:21 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
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मिड-डे मील
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जनपद में प्राथमिक विद्यालय 2267 और जूनियर विद्यालय 983 हैं। इन छात्रों को मिड-डे मील उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगभग 17 करोड़ रुपये प्रतिमाह खर्च करती है लेकिन आज भी ऐसे विद्यालय हैं, जहां नौनिहाल भूखे पेट ही पढ़ने को मजबूर हैं। किसी विद्यालय में विवाद तो किसी विद्यालय में अनाज के अभाव में भोजन नहीं बन रहा है।
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जिले के प्राथमिक विद्यालयों में कुल 294776 और जूनियर विद्यालयों में 94266 छात्र हैं। लाटघाट संवाददाता के अनुसार, हरैया ब्लॉक में कुल प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 117 और जूनियर की 55 है। प्राइमरी में 15000 और जूनियर में 4500 बच्चे हैं। सोमवार को प्राथमिक विद्यालय सपहा पाठक पर पूर्वाह्न 11.30 बजे पढ़ाई के समय प्रभारी प्रधानाध्यापक गीता यादव बच्चों से गड्ढे में मिट्टी भरवा रही थी। विद्यालय में भोजन नहीं बन रहा था, बताया कि अनाज नहीं है।

वहीं, प्राथमिक विद्यालय चिलबिली दान चिलबिली में बच्चे खुद चाय समोसा बना रहे थे। प्रधानाध्यापक राजदेव सिंह ने कहा कि एमडीएम नहीं बना है, बच्चे जिद कर स्वयं बना रहे हैं। वहीं, प्राथमिक विद्यालय बनावें में एमडीएम की मीनू के अनुसार, सब्जी और रोटी बनी थी लेकिन बच्चे बिना हाथ धोए ही खाने बैठ गए। वहां साबुन और तौलिया नहीं था। कक्षा चार के विद्यार्थी आशीष, अरविंद और प्रीति ने बताया कि भोजन तो बनता है लेकिन कोई भी अध्यापक उसे नहीं खाता। ब्लॉक के एमडीएम प्रभारी रामनिवास यादव ने बताया कि ब्लाक क्षेत्र के लगभग सभी विद्यालयों में एमडीएम बन रहा है।
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अहरौला संवाददाता के अनुसार, बिलारी ग्राम सभा में जूनियर और प्राथमिक दोनों विद्यालय है। प्राथमिक विद्यालय में चार माह से भोजन नहीं बन रहा है। प्रधानाध्यापक सुरेंद्र यादव ने कहा कि दोनों स्कूलों पर दिसंबर 2015 से पूर्व प्रधान, वर्तमान प्रधान और कोटेदार के बीच मतभेद से बाधा उत्पन्न हुई है। जब कोटेदार द्वारा राशन नहीं दिया गया, तब फरवरी 2016 में जिलाधिकारी से शिकायत की गई, तब जिलाधिकारी के निर्देश पर कोटेदार ने फरवरी में राशन उपलब्ध कराया। तब से जूनियर स्कूल पर भोजन बन रहा है। वहीं पर प्राथमिक के बच्चे भी भोजन करने जाते हैं दोनों विद्यालयों के बीच 800 मीटर की दूरी है। बच्चों के आने-जाने में परेशानी होती है।

सुरेंद्र यादव का आरोप है कि यहां तीन रसोइया जूनियर में और तीन प्राथमिक में थी लेकिन प्रधानों ने उन्हें आने से रोक दिया, जिससे कभी कभी स्कूल की शिक्षिकाओं ने भोजन पकाया। किसी तरह से तीन रसोइया अस्थाई काम कर रही हैं। उनका आरोप है कि पूर्व और वर्तमान प्रधान धमकी देते हैं। इसकी शिकायत खंड शिक्षाधिकारी से की गई है। वहीं, पूर्व प्रधान प्रवीन यादव ने ऐसी बात से इंकार किया। वर्तमान प्रधान संतोष ने कहा कि भोजन के विषय में प्रधानाध्यापक से कहासुनी जरूर हुई लेकिन धमकी जैसी कोई बात       नहीं थी।
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