आजमगढ़। अप्रैल की शुरूआत हो चुकी है। गर्मी के तेवर मार्च के अंत से दिखने शुरू हो गए हैं। मार्च माह के अंत में ही जनपद का अधिकतम तापमान 38 डिग्री तक पहुंच चुका है। वहीं, कुछ ब्लाकों में इसे 40 के आसपास भी दर्ज किया गया। दोपहर में तीखी धूप और गर्म हवा के थपेड़े लोगों को परेशान करना शुरू कर चुके हैं। धूप इतनी तेज हो रही है कि दोपहर में लोग सड़कों पर निकलने से बचने लगे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र कोटावा के मौसम वैज्ञानिक के अनुसार इस बार पिछले वर्ष की अपेक्षा गर्मी ज्यादा परेशान करेगी। कई रिकार्ड टूट सकते हैं।
मार्च के अंत में ही पारे ने 39 डिग्री सेल्सियस तक दस्तक दे दी थी। हालांकि इसके बाद इसमें एक-दो डिग्री की कमी हुई है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान भी एक डिग्री कम होकर 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया। तीखी धूप से आम जनमानस के साथ पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। चिलचिलाती धूप में निकलने वाले लोगों की त्वचा मानों झुलस जा रही है। दोपहर बाद तो घर से निकलना मुश्किल हो गया है। पछुआ हवा ने दोपहिया या पैदल सफर करने वालों की मुसीबत में इजाफा कर दिया है। हवा से उड़ने वाली धूल परेशानी और बढ़ा रही है।
कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा के मौसम वैज्ञानिक टीपी सिंह ने बताया कि अप्रैल से जून तक तापमान ज्यादा रहेगा। उत्तर और पूर्वी भारत में सूरज की तपिश लोगों को झुलसाएगी। अप्रैल से जून तक दिन का तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। आने वाले दिनों में बारिश के कोई आसार नहीं हैं। मौसम एकदम साफ रहेगा।
लगातार सिंचाई करें किसान
आजमगढ़। बढ़ते तापमान को लेकर कृषि वैज्ञानिकों की ओर से भी किसानों के लिए सलाह दी गई है। सब्जियों और मूंग के खेत में हल्की नमी बनाए रखने के लिए एक सप्ताह के अंतराल पर सिंचाई करते रहें। तैयार चना, मसूर, तीसी एवं सरसों आदि फसलों की कटाई एवं मड़ाई करें। मिर्च की फसल में माहू (लाही), सफेद मक्खी, तथा थ्रिप्स कीट के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल दवा की एक मिली मात्रा प्रति पांच लीटर पानी में मिलाकर या थायोमेथाक्साम दवा की एक ग्राम मात्रा प्रति तीन लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। उर्द व मूंग की फसल में खरपतवार के नियंत्रण के लिए बुवाई के 20 से 25 दिन बाद इमजाथाई पर 10% एसएल (परस्यूट) की 300 से 400 मिली मात्रा 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
पशुपालक भी रहें सावधान
आजमगढ़। सीवीओ डॉ. वीके सिंह ने बताया कि दुधारू पशुओं के आहार में कम से कम 30 से 40 ग्राम साधारण नमक तथा खनिज लवण अवश्य मिलाएं तथा तथा पशुओं को गर्मी में लू से बचाने के लिए दिन में दो से तीन बार स्वच्छ जल पिलाएं। मांस का उत्पादन करने वाली मुर्गियों को गर्मी से बचाने के लिए उत्तरी और दक्षिणी दिशा में खिड़कियों पर टाट के पर्दे लगाकर दोपहर बाद पानी का छिड़काव करते रहें।
धूप में करें सन बर्न से बचाव
आजमगढ़। सीएमओ डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि तेज धूप में निकलते वक्त शरीर को पूरी तरह ढंक कर निकलें। तेज धूप के संपर्क में शरीर का हिस्सा आने से त्वचा में मौजूद मैलानिन नामक वर्णक ऊपरी सतह पर आ जाती है, इससे शरीर काला पड़ने लगता है। इसे सन बर्न कहा जाता है। नींबू, खीरा, ककड़ी, तरबूज के साथ ही फलों और हरी सब्जियों का सेवन करें। बासी खाना और खुले बिक रहे कटे फल खाने से बचें। ठंडा पानी पीने और धूप में निकलने से बचें।