भदोही ब्लॉक के पिपरिस गांव में जिले का दूसरा एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) बनेगा। इसके लिए जमीन चिह्नित हो गई है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत एक करोड़ की लागत से इसका निर्माण किया जाएगा। ज्ञानपुर ब्लॉक के भगवास में 15 दिन पहले ही एक एफएसटीपी के लिए जमीन चिह्नित की जा चुकी है।
जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत तीन लाख से अधिक एकल शौचालय और 520 से अधिक सामुदायिक शौचालय का निर्माण किया गया है। तीन से चार साल पूर्व बने सामुदायिक शौचालय के टैंक भर जाते हैं। मल-जल के निस्तारण के लिए पंचायतों को शहर से वाहन को बुलाना पड़ता है। इसके लिए तीन से पांच हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। अब सरकार तीन से पांच हजार की आबादी वाली ग्राम पंचायतों में एफएसटीपी निर्माण कराने की कवायद शुरू की है। पहले चरण में दो ग्राम पंचायतों में इसका निर्माण होना है। एफएसटीपी का मूल उद्देश्य शहरों की तरह गांवों में मल-जल का निस्तारण करना है। एफएसटीपी मल को खाद में परिवर्तित कर देगा, जिससे खेतों की मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी। इसकी क्षमता 6 से 10 केएलडी होगी।
ऐसे काम करता है एफएसटीपी : मल, कीचड़ और सेप्टेज को सुरक्षित रूप से उपचारित करने का एक संयंत्र है। इसमें मल से ठोस और तरल पदार्थों को अलग किया जाता है। ठोस पदार्थ को खाद के रूप में उपयोग किया जाता है। तरल पानी को सिंचाई के लिए शुद्ध किया जाता है। इसकी स्क्रीनिंग चेंबर में मल को डाला जाता है, जहां ठोस कचरा अलग हो जाता है। इसके बाद मल को प्लांटेड ड्राइंग बेड में भेजा जाता है, जहां पत्थर और बजरी की सतहें ठोस और तरल को अलग करती हैं। तरल आगे बढ़ता है और ठोस मल सूखने के बाद खाद बन जाता है। तरल पदार्थ को एनारोबिक बफल्ड रिएक्टर (एबीआर) में भेजा जाता है, जहां प्रदूषकों को कम किया जाता है। इसके बाद तरल पानी को प्लांटेड ग्रेवल फिल्टर से गुजारा जाता है, जहां जलीय पौधों की मदद से पानी और शुद्ध होता है। अंत में पानी को पॉलिशिंग पॉन्ड में ले जाया जाता है, जहां सूर्य की रोशनी और हवा के संपर्क से इसका शुद्धिकरण होता है।
वर्जन
जिले की दो ग्राम पंचायतों में दो करोड़ रुपये से एफएसटीपी बनेंगे। ज्ञानपुर के भगवास और भदोही के पिपरिस में जमीन मिल गई है। जल्द ही इसका निर्माण शुरू होगा।- डॉ. सपना अवस्थी, डीपीआरओ भदोही