कस्बा स्थित हिंदी सुबोध संस्थान के मारकंडेय भवन स्थित कार्यालय पर गुरुवार को विचार गोष्ठी का आयोजित किया गया। इसमें असहिष्णुता तथा व्यवस्था में शासन की नाकामी को लेकर सम्मान वापस किया जाना कितना औचित्यपूर्ण है, विषय पर वक्ताओं ने चर्चा की।
पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पूर्व डीन फैकल्टी आफ आर्ट डा. सत्येंद्र सिंह ने कहा कि भारत में निवास करने वाला कभी कोई व्यक्ति असहिष्णु नहीं हो सकता। शक, हूण, कुषाण, मंगोलो के आगमन पर भी हिंदू असहिष्णु नहीं हुआ।
वामपंथी सोच के साहित्यकार, कथाकार जो विद्वान होने का ढोंग करके किसी प्रकार सम्मान प्राप्त किए हैं, वही इसे वापस करके सत्ता पर दबाव बनाना चाहते हैं।
सुरेश पाल ने कहा कि सम्मान के साथ धनराशि आदि भी वापस कर देना चाहिए। डा. गिरि ने कहा कि विपक्ष के इशारे पर किया जा रहा है। बुद्धिजीवी को अपना विरोध प्रकट करने का एक यही उचित माध्यम है।
गोष्ठी में प्रदीप कुमार राय, अवधेश राय, शिशिर कुमार अस्थाना एडवोकेट, ब्रजेश कुमार, गौरव कुमार, सर्वेश कुमार, राहुल राज, रविशंकर आदि उपस्थित रहें। संचालन समर बहादुर सिंह एडवोकेट ने की।