नगर के ठंडी सड़क पर वन विभाग द्वारा पार्क का निर्माण कराया गया है। लेकिन विभाग की उदासीनता से पार्क बदहाल हो चला है। लोगों ने पार्क को संवारने के लिए कई बार प्रयास किया, लेकिन विभाग की शिथिलता से कोई सफलता नहीं मिली। ऐसे में सामाजिक संगठन आगे आए, इसमें भारत रक्षा दल ने इस पार्क को संवारने का बीड़ा उठाया।
जिला मुख्यालय पर ऐसा कोई स्थान नहीं है, जहां लोग परिवार के संग आउटिंग कर सकें, ले देकरा दो पार्क हैं, भी तो दोनों बदहाल है, इसमें नगर पालिका तो कुंवर सिंह उद्यान की देखभाल करता है, इसके बाद भी वह बदहाल है, इसीक्रम में ठंडी सड़क पर बंधे की जमीन बनाया गया पार्क उपेक्षा का शिकार है। इस पार्क की देखरेख का कार्य वन विभाग करता है, लेकिन विभाग की उदासीनता से वर्तमान समय में पार्क आंसू बहा रहा है। वन विभाग द्वारा जब इसकी स्थापना की गई थी तो इस पार्क की देखभाल के लिए एक कर्मचारी की तैनाती की गई थी। जिसकी देखरेख के कारण यह पार्क लोगों के आकर्षण का केंद्र हुआ करता था। परिवार के साथ लोग यहां पहुंचकर अपना समय व्यतीत करते थे। बच्चे पार्क में लगे झूले आदि का आनंद उठाते थे। लेकिन समय बीतने के साथ उक्त कर्मचारी को हटा लिया गया। जिसके कारण इसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं बचा। इसको सुंदर बनाने के लिए लगाए गए पौधे झांड़ झंखाड़ में तब्दील हो गए। बच्चों के लिए लगाए गए झूले आदि जंग लगने से खराब हो गए। अब दिन में भी लोग इस पार्क में जाना बंद कर दिए। सबसे बड़ी बात तो यह है कि प्रदेश सरकार के वनमंत्री दारा सिंह चौहान खुद आजमगढ़ जनपद के गेलवारा गांव के निवासी हैं। लेकिन उनके द्वारा अपने गृह जनपद में स्थित वन विभाग के पार्क को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया। इसके पूर्व सपा शासन काल में वनमंत्री दुर्गा प्रसाद यादव रहे लेकिन उनके द्वारा भी इस पार्क को लेकर कुछ नहीं किया गया।
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जनप्रतिनिधि बने उदासीन, तो भारद आया आगे
आजमगढ़। ठंडी सड़क स्थित वन विभाग के पार्क की दुर्दशा को लेकर कई बार आवाज उठी लेकिन सुनी नहीं गई। तब भारत रक्षा ने इसे साफ करने का बीड़ा उठाया। लगभग तीन महीने तक लगातार उसके सदस्यों ने पार्क की साफ-सफाई की। आज भी उसके सदस्य पार्क की सफाई करते रहते हैं। जिसके कारण पार्क की सेहत में कुछ सुधार होता नजर आता है।
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अगल-बगल के दुकानदार फेंक रहे कूड़ा
आजमगढ़। वन विभाग द्वारा पार्क की घेराबंदी करने के लिए जगह-जगह पिलर लगाकर कंटीले तार लगाए गए थे। ताकि इस पार्क में लगे पौधों को पशुओं से बचाया जा सके। आज यह घेराबंदी जगह-जगह से टूट चुकी है। अगल-बगल के दुकानदार पार्क में कूड़ा फेंककर जलाने का कार्य करते हैं।
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बोले लोग
- फोटो संख्या- जब इस पार्क की स्थापना हुई थी तो यह पार्क काफी सुंदर था। दूर दराज से आने वाले लोग इसमें अपना समय व्यतीत करते थे। परिवार के साथ भी लोग यहां समय बिताने के लिए आते थे। बच्चे झूला झूलते थे। लेकिन आज यह पार्क बदहाल हो गया है।
एसके सत्येन
- फोटो संख्या- पार्क में आवारा पशुओं को घुसने से रोकने के लिए इसकी घेराबंदी कंटीले तारों से की गई थी। लेकिन आज यह घेराबंदी कई जगहों पर टूट चुकी है। इसमें लोग कूड़ा फेकना शुरू कर दिए हैं। बीआरडी के कार्यकर्ताओं ने दो से तीन महीने मेहनत कर इसकी साफ-सफाई की तो इसकी हालत कुछ अच्छी हुई है।
सूरज जायसवाल
- फोटो संख्या- पूर्व सरकार में भी अपने जिले के ही वन मंत्री थी और इस सरकार में भी इसी जनपद के रहने वाले दारा सिंह चौहान वनमंत्री हैं। इसके बाद भी वन विभाग के पार्क की तरफ उनके द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिसके मजबूर होकर हमें इस पार्क की सफाई करनी पड़ी। आगे भी हम अपने स्तर से इसकी देखभाल करेंगे।
हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव, प्रदेश उपाध्याक्ष बीआरडी।
- फोटो संख्या- जनपद में कोई भी ऐसा पार्क नहीं है जहां लोग बैठकर सुकून से कुछ समय बिता सकें। पहले तो इस पार्क की हालत काफी अच्छी थी लेकिन अब इसमें बैठना भी मुश्किल है। अगर वन विभाग को देखभाल नहीं करनी थी तो इसे बनाने की जरूरत समझ से परे है।
गोविंद दुबे।
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हमारे पास इस पार्क की देखरेख के लिए कोई बजट नहीं आता है। अगर बजट आता तो हम इसकी देखभाल के लिए एक कर्मचारी तैनात करते। कुछ दिन तक विभाग द्वारा अपने पास से पैसा खर्च कर यहां पर कर्मचारी तैनात किया गया था, लेकिन शासन से पैसा न मिलने के कारण उसे हटा दिया गया।-गंगादत्त मिश्रा, डीएफओ।