आजमगढ़। युवाओं में स्मार्टफोन और लैपटॉप के अत्यधिक उपयोग से गर्दन झुकाकर रखने के कारण टेक्स्ट नेक सिंड्रोम तेजी से बढ़ रहा है। घंटों स्क्रीन देखने से गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है। इससे गर्दन में दर्द, जकड़न और गंभीर मांसपेशियों में खिंचाव जैसी समस्या हो रही है। ये समस्या किशोरों के शारीरिक विकास को प्रभावित कर रही है।
जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश जायसवाल ने बताया कि बिस्तर पर लेटकर मोबाइल चलाना आजकल लोगों की आम आदत बन गई है। लेटकर मोबाइल चलाने से शरीर की पोजीशन असंतुलित हो जाती है, जिससे गर्दन, कंधे और रीढ़ की हड्डी पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से टेक्स्ट नेक जैसी समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिसमें गर्दन में दर्द, अकड़न और झुकाव की समस्या हो जाती है।
उन्होंने बताया कि ओपीडी में रोज 140- 150 मरीज आ रहे हैं। इसमें से 55 से 60 मरीज इस तरह के आ रहे हैं। इसमें अधिक संख्या में युवा हैं। यही नहीं मोबाइल को आंखों के बेहद करीब रखकर इस्तेमाल करने से आंखों पर सीधा असर पड़ता है। रात के समय स्क्रीन की रोशनी आंखों और दिमाग दोनों को प्रभावित करती है। इससे न सिर्फ नींद पूरी नहीं हो पाती बल्कि लोगों में चिड़चिड़ापन भी होने की समस्या बढ़ने लगती है।