ब्लाक के चिस्तीपुर के कौलेश्वर धाम (कैलीस्थान) पर चल रहे नौ दिवसीय श्रीरामकथा में मथुरा से पधारे अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि भरत और केवट से त्याग और भक्ति की प्रेरणा लेनी चाहिए। क्योंकि राम और भरत ने संपत्ति का नहीं बल्कि विपत्ति का बंटवारा किया था।
बुधवार को कथा का रसपान कराते हुए अतुल कृष्ण ने कहा कि कोई भी मां अपने बेटे को कष्ट नहीं देती। वनगमन के समय श्रीराम की भेंट उनके प्रिय सखा निषादराज से हुई, उसके बाद गंगा नदी पार करने के लिए भगवान केवट से मिले। भगवान को साक्षात सामने पाकर केवट ने अपनी व्यथा सुनाई कि उसे समाज द्वारा अछूता माना जाता है। आप जब तक मुझसे अपना चरण नहीं धुलवाएंगे तब तक मैं आपको नदी पार नहीं कराऊंगा। अंत में विवश होकर भगवान को केवट से चरण धुलवाने पड़े। जिससे उसके साथ उसकी सभी पीढ़ियां तर गई।
आप सभी यदि सच्चे मन से भगवान की भक्ति करें तो आप भी भगवान के दर्शन पाकर तर जाएंगे। कथा के दौरान भजन ‘मीठे रस से भरी राधा रानी लागे’ को सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए। इस दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष सावित्री देवी, द्वारिका प्रसाद जायसवाल, हीरालाल वर्मा, छांगुर प्रसाद, प्रदीप जायसवाल, जितेंद्र सोनी, अनिल जायसवाल के साथ ही कई गणमान्य लोगों की मौजूदगी रही।