आजमगढ़। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई को प्रभावी बनाने और सीखने की क्षमता बढ़ाने के लिए शिक्षण व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। निपुण भारत और समग्र शिक्षा के तहत जिले के 2706 परिषदीय विद्यालयों में नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य बच्चों के सामाजिक-भावनात्मक स्वास्थ्य, समझ, लेखन क्षमता और गणितीय सोच को मजबूत करना है।
इसके लिए कक्षा शिक्षण में बदलाव के 10 सूत्र तय किए गए हैं। शिक्षकों को कक्षा का वातावरण सहज, सुरक्षित और सकारात्मक बनाने के निर्देश दिए गए हैं। नियमित अभ्यास कार्य देने, विद्यार्थियों की समझ का आकलन करने और प्रभावी फीडबैक देने पर जोर दिया गया है। बीएसए राजीव कुमार पाठक ने बताया कि बच्चों के सीखने के स्तर की नियमित जांच की जाएगी। इसके लिए अलग-अलग शिक्षण रणनीतियों का इस्तेमाल होगा। पढ़ाई में पिछड़ रहे विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त शिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। कक्षा में बच्चों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए शिक्षण प्रक्रिया की योजना तैयार की जाएगी। पठन और मौखिक भाषा के विकास के लिए बच्चों से खुले प्रश्न पूछे जाएंगे, जिससे उनकी सोचने और तर्क करने की क्षमता बढ़ेगी। विद्यार्थियों को स्वतंत्र लेखन का अभ्यास कराने के साथ जरूरत के अनुसार मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। शिक्षक के निर्देशन में बच्चे जोड़ी, छोटे समूह और व्यक्तिगत रूप से पढ़ने का अभ्यास करेंगे। गणितीय अवधारणाओं को स्पष्ट करने के लिए शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) का नियमित उपयोग किया जाएगा। बच्चों से ‘क्यों’ और ‘कैसे’ जैसे सवाल पूछकर विषय की समझ विकसित की जाएगी। नियमित आकलन के आधार पर बच्चों की सीखने संबंधी जरूरतों को पहचाना जाएगा और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए जरूरी सहयोग दिया जाएगा। संवाद