आजमगढ़। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि किसानों को अच्छी पैदावार के लिए 15 नवंबर से पहले गेहूं की बोआई कर लेनी चाहिए। इससे उनकी पैदावार चार से पांच क्विंटल अधिक पैदावार होगी।
इसमें किसानों को अलग से कोई लागत नहीं लगानी पड़ेगी। वह अच्छी पैदावार कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा के अध्यक्ष और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एलसी वर्मा ने बताया कि इस बार बाजार में गेहूं के अच्छे भाव मिलने की संभावना है। बीते पांच वर्षों से बोआई के ऊपर किए गए शोध में पाया कि अगर किसान गेहूं की बोआई नवंबर के पहले पखवाड़े, यानी एक से 15 नवंबर के बीच करता है तो पैदावार में पांच क्विंटल प्रति हेक्टेयर की बढ़ोतरी की संभावना है। जिन किसानों के खेत खाली हों या धान की कटाई हो गई है वह उसी नमी पर जीरो टिलेज, सुपर सीडर या हैप्पी सीडर मशीन का प्रयोग कर गेहूं की बोआई कर सकते हैं। जिन खेतों में फसल अवशेषों के ढेर हैं, तो वह किसान मल्चर मशीन का प्रयोग कर फिर सुपर सीडर से बोआई करें। इससे पराली खाद बनकर खेत की उर्वरा शक्ति भी बढ़ाई जा सकती है।
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इन प्रजातियों का करें चयन
गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए किसान एचडी 3226, डीबीडब्ल्यू 187, डीबीडब्ल्यू 252, डीबीडब्ल्यू 222 और एचडी 2967 का चयन करें। बोआई से पहले खेत में 45 किलो यूरिया प्रति एकड़ के हिसाब से डाल दें। फिर सुपर सीडर में 50 किलो डीएपी व 40 किलो पोटाश डालकर बोआई करें। प्रति एकड़ 40 किलो बीज का प्रयोग करें। गेहूं की पूरी फसल के दौरान तीन बार में 110 किलोग्राम यूरिया देना होता है।