फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महफिलों में पेश किए हजरत अली की शान में कसीदें

विज्ञापन
विज्ञापन
आजमगढ़। ईद-ए-गदीर के पर शिया समुदाय के लोगों ने शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में हजरत अली की शान में महफ़िलों का आयोजन कर उनकी शान में कसीदे पेश किए। घरों में महिलाओं ने तिलावते कलाम-ए-पाक और दुआ ए नोदेबा पढ़ी। मौला अली की शान में नात पाक पेश कर उन्हें खिराजे अकीदत पेश की। ईद-ए-गदीर के मौके पर कार्यक्रम स्थल को सजाया और संवारा गया था। कार्यक्रम के दौरान घरों में भी सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा गया।
विज्ञापन

मस्जिदों में नमाज-ए-गदीर एवं दुख्वानी की गई। उलेमा मौला अली के फजायल बयान किए। फूलपुर के शिया इमाम बारगाह में महफ़िल सजाई गई। ऊदपुर स्थिति अहसन रजा के आवास पर शायरों ने हजरत अली के शान में कसीदे पेश किए। इस दौरान मोहम्मद हारून, शुजात, शहजात, अब्बास, अहसन, रजा, मुहम्मद हसन रहे। दसमड़ा गांव के शहंशाह हुसैनी में देर रात तक कसीदे पढ़े गए। फूलपुर के नुसरत आजमी के वास पर ख्वातीन निदहत फातिमा की ओर से महफ़िल सजाई गई। इसमें महिलाओं ने कसीदे पेश किए। महफ़िलों के समापन पर दुवाख्वानी हुई। इसमें मुल्क में अमन चैन और कोरोना महामारी के समाप्त होने की परवरदिगार आलम से दुआ की गई। मौलाना फ़रहत हुसैन ने कहा कि ईद-ए-गदीर शिया मुसलमान जिल्लहिजा की 18 तरीख को मनाते हैं। इसी दिन पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद (स.अ.) ने हज से लौटते हुए कुम में गदीर के मैदान में सवा लाख हाजियों के बीच हजरत अली (अ.स.) को अपना उत्तराधिकारी बनाया था।मौलाना वसी मुहम्मद खां इमामे जुमा चमावां ने कहा कि ईदे-गदीर का जश्न हर साल घर-घर मनाया जाता है। यह हमारे लिए सभी त्योहारों से बढ़ कर है। हालांकि इस साल कोविड-19 को देखते हुए इसे सादगी से मनाया गया। सभी औपचारिकता पूरी की गईं। महफ़िलों में सरकार की गाइडलाइन के तहत सोशल डिस्टेंसिंग बनाई गई। कोरोना संक्रमण से निजात पाने के लिए मौला अली से दुआख्वानी भी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें