आजमगढ़। जिले के 22 ब्लॉक की 1858 ग्राम पंचायतों में कागज पर भले ही सामुदायिक शौचालयों का संचालन हो गया हो। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। यहां के अधिकतर गांवों में या तो सामुदायिक शौचालय अधूरे पड़े हैं या फिर उनके ताले ही नहीं खुल रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों को अब भी खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। पंचायती राज विभाग की ओर से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत घर-घर शौचालय बनवाए गए हैं। लेकिन तमाम ग्रामीण ऐसे हैं जिनके पास शौचालय बनवाने के लिए भूमि ही नहीं है। ऐसे लोग भी खुले में शौच नहीं जाएं, इसको देखते हुए हर ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचलय का निर्माण कराया गया है। शौचालयों की देखरेख के लिए स्वयं सहायता समूह से केयर टेकर भी रखे गए हैं। अमर उजाला की पड़ताल में पता चला कि ज्यादातर शौचालय अधूरे पड़े हैं। किसी में रनिंग वाटर सप्लाई नहीं है तो किसी में गड्ढा नहीं बना या फिर टाइल्स नहीं लगी है। इसकी बानगी ग्राम पंचायत जाफरपुर, व तमौली गांव में देखी जा सकती है। इन गांवों में सार्वजनिक शौचालय का निर्माण अभी भी अधर में है। नतीजतन अभी भी ग्रामीण खुले में शौच जाने को मजबूर हो रहे हैं। जबकि शौचालयों को खुलने का समय सुबह पांच से नौ बजे व शाम के समय चार से आठ बजे तक है। सबसे बड़ा सवाल है कि यदि शौचालय खुलने व बंद होने के निर्धारित समय के बाद किसी को शौच लगेगा तो वह कहां जाएगा।
कभी-कभी खोलकर पूरी होती औपचारिकता
लाटघाट। विकास खंड हरैया के ग्राम पंचायत बेलकुंडा में बना सामुदायिक शौचालय तो बेहतरीन है। बेहतरीन हो भी क्यों नहीं सरकार ने भरपूर पैसे जो खर्च किए हैं। पर जिम्मेदार शासन की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। ऐसे में लोगों को शौच करने के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। जिससे स्वच्छ भारत मिशन की पोल खुल रही है।
शौचालय बंद होने से आ रही समस्याएं
लाटघाट। विकास खंड अजमतगढ़ के ग्राम पंचायत कांखभार में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया है। ताकि लोग बाहर खुले में शौच न करें। इसके लिए शासन ने लाखों रुपये भी खर्च किए हैं। पर जिम्मेदार लोग शासन द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छ भारत मिशन पर पानी फेर रहे हैं। शौचालय में हर समय ताला बंद रहता है। जिससे ग्रामीणों को शौचालय के समय समस्या आती है। स्थानीय लोगों की माने तो कभी-कभी शौचालय का ताला खुलता है। बस कोरम पूरा करने के लिए।
लाखों खर्च, शोपीस बना शौचालय
आजमगढ़। स्वच्छ भारत मिशन के तहत पल्हनी ब्लाक के जाफरपुर गांव में सामुदायिक शौचालय बनाया गया है। शौचालय बाहर से तो सब चकाचक दिखाया जा रहा है लेकिन अंदर कोई व्यवस्था नहीं है। यहां तक की पानी के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में जाफरपुर के लोग खुले में शौच करने जाते हैं। इसकी बानगी हर दिन सुबह को देखने को मिलती है। जबकि स्वच्छ भारत बनाने के लिए पीएम व सीएम गंभीर है लेकिन अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं है।
निर्माण काल से बंद पड़ा शौचालय
आजमगढ़। पल्हनी ब्लाक के तमौली गांव में बना सामुदायिक शौचालय निर्माण काल से ही बंद है। जिससे लोगों को समस्या होती है। जबकि इस शौचालय पर लाखों रुपये खर्च किए जा चुके है। बावजूद जिम्मेदार इसे चालू नहीं कर रहे हैं। जिससे स्वच्छ भारत मिशन की धज्जियां उड़ रही है। इस तरफ जिम्मेदार को ध्यान देने की जरूरत है। इस मामले में डीपीआरओ लालजी दुबे ने बताया कि सामुदायिक शौचालयों में ताला बंद होने की फिलहाल कोई शिकायत नहीं मिली है। शौचालय खोलने के लिए ही उन्हें भुगतान किया जाता है। इसके बाद भी शौचालय आम जन के लिए नहीं खोले जा रहे हैं तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एक नजर सामुदायिक शौचालयों की प्रगति पर
कुल ग्राम पंचायत - 1858
सामुदायिक शौचालय का लक्ष्य - 1804
पूर्ण सामुदायिक शौचालय - 1752
जियो टैग - 1739
निर्माणाधीन - 52
अनारंभ - 54
स्वयं सहायता समूह को हैंडओवर - 1608
स्वयं सहायता समूह को भुगतान - 1559