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मृदा परीक्षण में पूरे जनपद में मिट्टी की सेहत मिली खराब

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आजमगढ़। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में की गई मिट्टी की जांच में मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन और बोरान की कमी पाई गई है। कृषि विभाग ने इस पर चिंता जताते हुए किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
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पहले की अपेक्षा कम लोग पशुपालन कर रहे हैं जिससे गोबर की खाद की कमी हो गई। ऐसे में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करने से मिट्टी की उर्वर क्षमता समाप्त हो रही है। जमीन में पोषक तत्वों की कमी हो गई है। इसको देखते हुए सरकार की ओर से मृदा परीक्षण कराया जा रहा है। जिले में लगभग पांच लाख किसानों के खेतों की जांच की गई। इस जांच में पाया गया कि जनपद की मिट्टी में सबसे ज्यादा कमी आर्गेनिक कार्बन की है। मिट्टी में एक प्रतिशत की जगह घटकर 0.5 प्रतिशत ही रह गया है। मिट्टी में कहीं जिंक तो कहीं बोरान और नाइट्रोजन की कमी पाई गई। इस कमी को दूर करने के लिए योजना बनाकर गोष्ठियों का आयोजन कर किसानों को इस कमी को पूरा करने के लिए प्रयोग किए जाने वाले उर्वरकों के संबंध में जानकारी देनी शुरू की गई लेकिन अभी जनपद में यह योजना फलीभूत होती नहीं दिख रही है। बृहस्पतिवार को 40 मॉडल गांवों में गोष्ठी कर किसानों को जागरूक किया गया।
कमी को दूर करने के लिए किए जा रहे उपाय
आजमगढ़। मृदा परीक्षण का कार्य पूरा होने के बाद मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए कृषि विभाग ने 20 गांवों का चयन किया है। यहां के किसानों को मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी दूर करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा हर गांव में अनुदान पर दो वर्मी कंपोस्ट का निर्माण भी कराया जा रहा है। अनुदान पर ढैंचा का बीज दिया जा रहा है। साथ ही फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अनुदान पर उपकरण उपलब्ध कराकर इस कमी को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
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गोष्ठियों में मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के उपाय अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक बता रहे हैं। जब तक किसान जीरो बजट खेती की ओर से किसान नहीं मुड़ेंगे तब तक उनकी आय को दोगुना करना मुश्किल होगा। साथ ही उनके खेतों के पोषक तत्वों की कमी को दूर करना भी मुश्किल है।-संगम सिंह मौर्य, जिला भूमि संरक्षण अधिकारी।
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